आंध्रप्रदेश:जानलेवा बनी डॉक्टरों की हड़ताल

डॉक्टर  (फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption जूनियर डॉक्टरों का कहना है की सरकार अस्पतालों की हालत बेहतर बनाने के लिए क़दम उठाए

आंध्रप्रदेश के सरकारी अस्पतालों के तीन हजार से ज्यादा जूनियर डॉक्टरों की एक महीने से चली आ रही हड़ताल ने रोगियों और उनके परिवारों के लिए एक गंभीर संकट खड़ा कर दिया है.

यह जूनियर डॉक्टर अपने वेतन बढ़ाने, ग्रामीण इलाकों में अनिवार्य सेवाकाल को घटाने सहित कई मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं.

क्योंकि अब तक सरकार ने उनकी मांगों का कोई सकारात्मक जवाब नहीं दिया है इसलिए वो अब आपातकालीन सेवाओं का भी बहिष्कार कर रहे हैं.

हैदराबाद के बड़े अस्पतालों गाँधी अस्पताल और ओस्मानिया अस्पताल सहित राज्यभर के कई सरकारी अस्पतालों से गत तीन दिनों में एक सौ से ज्यादा रोगियों के मरने की सूचना है लेकिन राज्य सरकार का कहना है कि इन मौतों का हड़ताल से कोई सम्बन्ध नहीं है क्योंकि सामान्य हालात में भी इतनी मौतें होती हैं.

जूनियर डॉक्टोर्स एसोसिएशन का कहना है कि राज्य सरकार ने उनसे अतीत में जितने समझौते किए थे उन पर कभी भी अमल नहीं किया गया इसलिए वो इसबार केवल वादों पर भरोसा करने के लिए तैयार नहीं हैं.

'अस्पतालों की हालत बेहतर हो'

जूनियर डॉक्टरों का कहना है की वो केवल अपनी मांगों के लिए हड़ताल पर नहीं हैं बल्कि वो चाहते हैं की सरकार अपने अस्पतालों की हालत को बेहतर बनाने के लिए राशि मंज़ूर करे और वहां वेंटिलेटर जैसे जीवन बचाने वाले उपकरण बढ़ाए ताकि गरीब लोगों को निजी अस्पतालों का रुख करने पर मजबूर न होना पड़े.

इस हड़ताल के करण सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले रोगियों को कड़ी मुश्किलों और पीड़ा का सामना करना पड़ रहा है. विशेष कर जब से इन डॉक्टरों ने आपातकालीन सेवाओं का बहिष्कार शुरू किया है गंभीर रूप से बीमार लोग तो निजी अस्पतालों में जाने पर मजबूर हो गए हैं.

गाँधी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक शेख़ महबूब ने बीबीसी को बताया की राज्य के इस सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में हालात अब बेहतर हैं क्योंकि बहार से 37 डॉक्टरों को लाया गया है और वो इमरजेंसी वार्ड सहित दूसरे वार्ड्स में सेवा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अस्पताल में गत 24 घंटों में 11 लोगों की मृत्यु हुई है जो की सामान्य से भी कम है.

इस हड़ताल से आम लोगों को होने वाले कष्ट के मद्देनज़र एक वकील ने उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल की है और अदालत से अनुरोध किया है की वो हड़ताल समाप्त करवाने के लिए हस्तक्षेप करे.

लेकिन उच्च न्यायालय ने तुरंत ही कोई आदेश जारी करने के बजाए सरकार को नोटिस दिया है की वो इससे पहले जूनियर डॉक्टरों के साथ किए गए समझौते का ब्यौरा अदालत के सामने रखे और उसके बाद ही कोई आदेश जारी किया जाएगा.

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