इन बच्चों को कोई नही 'डराता'

 शनिवार, 18 फ़रवरी, 2012 को 05:32 IST तक के समाचार
अनाथालय

''हमें कोई नहीं डराता, हम यहाँ बहुत खुश है और कहीं और नहीं जाना चाहते.'' दरियागंज के आर्य अनाथालय में पढ़ने वाली बच्चियों ने अपनी कॉपियों पर आख़िर ये वाक्य ही क्यों लिखा था?

पुरानी दिल्ली की सँकरी गलियों से होता हुआ मैं इस अनाथालय पहुँचा जहाँ पाँचवीं कक्षा की बच्चियाँ कुछ लिख रही थीं.

मैंने उनकी कॉपियों पर दर्ज लिखावट देखनी चाही और पाया कि लगभग सभी बच्चियों ने यही वाक्य लिखा था: ''हमें कोई नहीं डराता....!''

ये वही अनाथालय है जहाँ 11 वर्ष की एक बच्ची काजल ने पिछले साल 24 दिसंबर को अचानक अस्पताल में दम तोड़ दिया था. उसकी मेडिकल जाँच में पता चला था कि उससे लगातार बलात्कार किया जाता रहा था.

अनाथालय

खाली समय में ये बच्चे मनोरंजन के लिए लूडो खेलते है, यही इनका मनपसंद 'टाईम पास' है.

इस घटना के सामने आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने ख़ुद ब ख़ुद कार्रवाई शुरू कर दी है. लेकिन आर्य अनाथालय का मैनेजमेंट कहता है कि उन्हें बदनाम करने की साज़िश की जा रही है.

और अब यहाँ की बच्चियाँ अपनी कॉपियों में लिखती हैं कि उन्हें कोई नहीं डराता और वो यहाँ ख़ुश हैं.

अगर सब ख़ुश हैं तो इसी अनाथालय में पढ़ने वाले 14 वर्ष के गुमसुम से छात्र रजत गौतम ने आख़िर ये कविता क्यों लिखी?


''मां तेरा वो लोरियां सुनाना…
प्यार से सिर पर हाथ रखकर सुलाना....
भूला नहीं हूं कुछ भी
सब कुछ याद है मुझको...
रोता हूँ दिल ही दिल में, कैसे बताऊ तुझको,
दूर है तू मुझसे फिर भी लगती पास है...
तेरी आंचल की छाया पाने की अभी भी आस है.''

रजत गौतम जैसे 1600 बच्चे इस अनाथालय में शिक्षा पाते हैं. काजल भी उनमें एक थी. पर उसकी मौत ने 94 साल पुरानी इस संस्था के एक स्याह पहलू को उजागर कर दिया है.

मां के लिए दोहरा झटका

दिसंबर में जब लोग नए साल के जश्न की तैयारियों में व्यस्त थे, काजल मौत से जंग हार गई. लोगों की आंखें तब खुली जब उसके पोस्टमॉर्टम में पता चला कि उसके साथ कई बार बलात्कार किया गया.

आर्य अनाथालय

इसी अनाथालय में पिछले साल दिसंबर में 11 साल की काजल की मौत हो गई थी.

काजल की मौत उसकी मां के लिए दोहरा झटका लेकर आई. अपनी बच्ची की मौत के बाद हो रही काग़ज़ी कार्रवाई से वो इतनी परेशान हैं कि बेटी की मौत का दुख महसूस होने तक का समय उन्हे नहीं मिल पा रहा है.

वो अपने पति के साथ नहीं रहतीं और लोगों के कपड़े प्रेस करके अपना और अपने बचे हुए तीन बच्चों का भरण पोषण करती हैं.

ये उनके लिए एक मुश्किल समय है.

बच्ची की मां ने बीबीसी से कहा, ''अनाथालय वाले बच्चों को साल में सिर्फ़ एक बार आने देते है. वो पिछले साल मई में आई थी, उसके बाद से अनाथालय में ही थी. उसकी जब तबीयत काफ़ी ख़राब हो गई तब हमें बताया गया. फिर वो ख़त्म हो गई. डॉक्टरी जांच में पता चला कि उसके साथ ग़लत काम हुआ था.''

सवाल

काजल की मौत ने एक बार फिर वही सवाल खड़ा कर दिया है कि हमारे समाज में छोटे और असहाय बच्चे सुरक्षित क्यों नहीं है?

पर आर्य अनाथालय के प्रमुख वीरेश चौधरी इन सारे आरोपों का खंडन करते हैं.

वो कहते हैं कि ये उनके संस्थान को बदनाम करने की कोशिश है.

वीरेश चौधरी ने बीबीसी से कहा, ''चौरानवे साल पुराने इस संस्थान का नाम ख़राब करने की कोशिश की जा रही है. अगर बच्ची के साथ दुर्व्यवहार जैसी कोई घटना हुई भी है तो हम पुलिस को जांच के लिए सहयोग देने को पूरी तरह तैयार है.''

"ये किसी एक संस्था की बात नहीं है, ऐसी घटनाएं दूसरी संस्थाओं और घरों में भी होती है. लेकिन संस्थाए चलाने वाले समझ नहीं पाते कि ऐसे मामलों के साथ किस तरह से निपटा जाए. वो छुपाने की कोशिश करते है, सोचते है कि नाम खराब होगा. ये सोच सही नहीं है."

भारती अली, गैरसरकारी संस्था 'हक़' की सहनिदेशक

इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाने वाली एक गैर-सरकारी संस्था 'हक़' की सहनिदेशिका भारती अली कहती है कि अनाथालयों में यौन शोषण का ये कोई पहला और आख़िरी मामला नही है.

अली के अनुसार, ''ये किसी एक संस्था की बात नहीं है, ऐसी घटनाएं दूसरी संस्थाओं और घरों में भी होती है. लेकिन संस्थाए चलाने वाले समझ नहीं पाते कि ऐसे मामलों के साथ किस तरह से निपटा जाए. वो छुपाने की कोशिश करते है, सोचते है कि नाम ख़राब होगा. ये सोच सही नहीं है.''

काजल की मां का आरोप है कि अनाथालय से जुड़े लोगों ने उन्हें डरा-धमकाकर चुप रहने को कहा, पैसे देने की भी पेशकश की गई.

बच्चों की बेहतरी के लिए सरकारी फंड से चलने वाली संस्थाओं और ख़ुद सरकारी विभागों के सामने भी ये सवाल मौजूद है कि किसी काजल की मौत के बाद ही कार्रवाई क्यों होती है?

'...तो ऐसे दस मामले सामने आएंगे'

भावनाएं

"मां तेरा वो लोरियां सुनाना, प्यार से सिर पर हाथ रखकर सुलाना....भूला नहीं हूं कुछ भी, सब कुछ याद है मुझको...रोता हूँ दिल ही दिल में, कैसे बताऊ तुझको, दूर है तू मुझसे फिर भी लगती पास है...तेरी आंचल की छाया पाने की अभी भी आस है."

रजत, अनाथालय का एक छात्र

बच्चों के यौन शोषण पर आधारित अपनी किताब 'बिटर चॉकलेट' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुकी पिंकी विरानी कहती है, ''इस अनाथालय का ये मामला हमारे बीच कैंसर की तरह उजागर हुआ है. इसे एक अकेले मामले की तरह नहीं देखा जाना चाहिए. अगर इस मामले से निबटने में सावधानी नहीं बरती गई तो कल ऐसे दस मामले सामने आ सकते हैं.''

ये हाल केवल दिल्ली का नहीं है, देश के छोटे बड़े शहरों और गांवों में भी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार के मामले प्रकाश में आते है और सैकड़ों के बारे में तो किसी को पता भी नहीं चलता, लोक-लाज के चलते छुपा लिया जाता है.

काजल की मौत के बाद आर्य अनाथालय में स्थिति सामान्य दिखाने की कोशिश जारी है. इसीलिए मेरे जैसा बाहर का कोई व्यक्ति इस अनाथालय की कक्षाओं में जाता है तो पाता है कि बच्चियाँ अपनी कॉपियों में लिख रही हैं -- ''हमें कोई नहीं डराता, हम यहां बहुत खुश है और कहीं और नहीं जाना चाहते.''

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