एनसीटीसी के विरोधियों को चिदंबरम का जवाब

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Image caption गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कोलकाता में एनएसजी केन्द्र का उदघाटन किया.

राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केंद्र के गठन की योजना का भारत के आठ मुख्यमंत्रियों द्वारा विरोध किए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा है कि आंतरिक सुरक्षा केंद्र और राज्यों की साझा जिम्मेदारी है. कई राज्यों का कहना है कि एनसीटीसी देश के संघीय ढांचे को ख़तरा है.

कोलकाता में शनिवार सुबह एक समारोह में चिदंबरम ने एनएसजी यानी नेशनल सिक्युरिटी गार्ड के कोलकाता केंद्र का उद्घाटन किया लेकिन इस समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नही आई.

साल 2008 के मुबंई हमलों के बाद केंद्र ने कोलकाता, चैन्नई, हैदराबाद और मुंबई में एनएसजी के स्थाई केंद्रो के स्थापना की घोषणा की गई थी.

उसी कार्यक्रम के तहत कोलकाता में नए केंद्र की स्थापना की गई है.

कोलकाता में एनएसजी का ये केंद्र साल 2009 से काम कर रहा है लेकिन इसे अपना स्थाई ठिकाना शनिवार को मिला.

चिदंबरम ने समारोह में कहा, ''आंतरिक सुरक्षा एक जटिल मामला है और देश की सुरक्षा केंद्र और राज्य की साझा जिम्मेदारी है. भारतीय संविधान ने पुलिस और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्य को दी है. लेकिन साथ ही धारा 355 के तहत देश के हरेक हिस्से को बाहरी आक्रमण और आंतरिक गड़बड़ियों से सुरक्षा का जिम्मा भी दिया है.''

नहीं आई ममता बनर्जी

इस समारोह में पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ममता बनर्जी नहीं आई. उन्होंने मुकुल रॉय को अपने प्रतिनिधि के तौर पर भेजा.

गौरतलब है कि आतंकवाद से निपटने में आतंकवाद रोधी सभी उपायों के नियंत्रण एवं समन्वय के लिए हाल ही में गठित नेशनल काउंटर टेरेरिज्म सेंटर (एनसीटीसी) या राष्ट्रीय आतंकवाद रोधी केन्द्र का विरोध करने वालों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हैं.

एनसीटीसी का विरोध कर रहे नेताओं का कहना है कि इस एजेंसी को जो अधिकार दिए गए हैं उससे भारत के संघीय ढाँचे में राज्य के अधिकारों का हनन होगा.

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