'गुंडाराज' पर घिरी सपा

Image caption मायावती और कांग्रेस के नेता समाजवादी पार्टी के ख़िलाफ़ 'गुंडाराज' को बड़ा हथियार बना रहे हैं.

समाजवादी पार्टी शायद अपने विरोधियों के हर आरोपों को फ़्रंट फुट पर खेल रही है, लेकिन मायावती हो या कांग्रेस के नेता सपा के ख़िलाफ़ 'गुंडाराज' को बड़ा हथियार बना रहे हैं.

तर्क भी कई हैं. मसलन मुख़्तार अंसारी हो या अतीक़ अहमद- सभी जेल में हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के शासन में ये सभी फल-फूल रहे थे.

मायावती के समर्थक सुरक्षा-व्यवस्था के मामले में समाजवादी पार्टी के शासन को एक भी नंबर देने को तैयार नहीं. लखनऊ में ऐसे ही एक समर्थक अपनी दूकान पर झंडा टांग कर बैठे थे. नाम है मोहम्मद अय्यूब.

कहते हैं- बहनजी के शासनकाल में हमारी माँ-बहनें सुरक्षित हैं. जबकि मुलायम सिंह के शासन में ऐसा नहीं था.

जागरुकता अभियान

चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मतदाता जागरुकता अभियान में ज़ोर-शोर से चलाया हुआ है. शहर के किसी भी चौक-चौराहे पर जाइए, मतदान करने को प्रेरित करने वाले बड़े-बड़े होर्डिंग आपको मिल जाएँगे.

शहरों में मतदान के प्रतिशत को देखते हुए चुनाव आयोग के सामने लोगों को मतदान के लिए निकालना एक बड़ी चुनौती होती है.

आरोप ये भी लगते हैं कि शहरी लोगों का एक वर्ग मतदान के दिन को छुट्टी के दिन के रूप में लेता है और मतदान करने के लिए नहीं निकलता.

हालाँकि चुनाव आयोग ने पहली बार ऐसा नहीं किया है, लेकिन इस बार जागरुकता अभियान काफ़ी बड़े स्तर पर चलाया जा रहा है. अब देखना ये है कि लखनऊ में चलाए जा रहे इस अभियान का नतीजा क्या निकलता है.

बीबीसी से शिकायत

लखनऊ के चक्कर लगाने के क्रम में कुछ पत्रकार मित्रों से मुलाक़ात हुई. सवाल वही पुराना. बीबीसी ने कुछ रेडियो कार्यक्रमों को क्यों बंद कर दिया.

एक पत्रकार ने कहा- पता चला है कि बीबीसी हिंदी रेडियो का सुबह का कार्यक्रम शुरू हो रहा है, जो बहुत अच्छी ख़बर है.

लेकिन सबको बीबीसी से शिकायत है कि उन्हें चारों कार्यक्रम शुरू करने चाहिए.

कई पत्रकार तो ये भी याद कर रहे थे कि कैसे वे बीबीसी हिंदी के कई कार्यक्रमों को सुनते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे.

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