कब्र खोदने का मामला झूठा: सुप्रीम कोर्ट

 मंगलवार, 21 फ़रवरी, 2012 को 20:35 IST तक के समाचार
दंगों की एक पीड़ित महिला

वर्ष 2002 में गोधरा में ट्रेन में हिंदू कारसेवकों के मारे जाने के बाद हुए मुस्लिम विरोधी दंगों में लगभग 2000 लोग मारे गए थे

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में बिना अनुमति कब्रों को खोदने के एक मामले में गुजरात सरकार की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड के खिलाफ दर्ज मामले को 100 फीसदी झूठा बताया है और सरकार से जिम्मेदारी से काम करने की सलाह दी है.

वर्ष 2002 में गुजरात में मुसलमानों के खिलाफ हुए दंगों के बाद पंचमहल ज़िले के पांडरवाडा और आसपास के गावों के 28 अज्ञात लोगों के शवों को दफ्नाया गया था.

तीस्ता सामाजिक कार्यकर्ता है जिन्होंने पिछले दस सालों में इन दंगों के अनेक पीड़ितों की पैरवी की है.

इसके बाद गुजरात सरकार ने पंचमहल ज़िले के एक थाने में तीस्ता और अन्य लोगों के ख़िलाफ बिना अनुमति कब्रें खोदने का एक एफआईआर दर्ज किया था.

"ये याचिकाकर्ता को तंग करने के मकसद से लाया गया 100 फीसदी झूठा मामला है. ऐसे मामलों से गुजरात सरकार की साख बेहतर नहीं होती है.ये मामला झूठा है...अपने मुवक्किल से कहें कि इस तरह के मामलों को आगे न बढ़ाए. कुछ ज़िम्मेदारी दिखाएँ और सरकार से कहें कि इस मामले को आगे न बढ़ाए"

सुप्रीम कोर्ट

पिछले साल 27 मई को गुजरात हाई कोर्ट ने तीस्ता के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया था जिसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट गई थीं.

'जिम्मेदारी दिखाएँ, एफआईआर गंभीरता से पढ़ें'

सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के जवाब में दिए हलफनामे में राज्य सरकार तीस्ता के विरुद्ध मामले को सही ठहराया था और उन पर बिना अनुमति, योजना बनाकर कब्रों को खोदने का आरोप लगाया था.

राज्य सरकार का कहना था कि जाँच में सामने आया है कि तीस्ता मुख्य अभियुक्त हैं क्योंकि अन्य अभियुक्तों ने अपने को निर्दोष बताते हुए तीस्ता पर उन्हें भड़काने का आरोप लगाया है.

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के जज आफताब आलम और जज रंजना प्रकाश देसाई की पीठ ने इस मामली की सुनाई की.

सुप्रीम कोर्ट की पीठ का कहना था, "ये याचिकाकर्ता को तंग करने के मकसद से लाया गया 100 फीसदी झूठा मामला है. ऐसे मामलों से गुजरात सरकार की साख बेहतर नहीं होती है.ये मामला झूठा है...अन्य मामलों में हो सकता है कुछ दम हो."

कोर्ट ने सरकारी वकील से कहा, "अपने मुवक्किल से कहें कि इस तरह के मामलों को आगे न बढ़ाए. कुछ ज़िम्मेदारी दिखाएँ और सरकार से कहें कि इस मामले को आगे न बढ़ाए."

जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वकील को गंभीरता से एफआईआई पढ़ने का सुझाव दिया वहीं उसने तीस्ता के विरुद्ध आपराधिक मामला चलाने के बारे में दी गई अंतरिम रोक को 23 मार्च (अगली सुनवाई) तक के लिए बढ़ा दिया है.

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