मछुआरों की हत्या पर भारत- इटली विवाद बरकरार

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Image caption भारत ने इस मामले में कड़ा रुख़ अपनाया है

इतालवी कार्गो जहाज से हुई फायरिंग में दो भारतीय मछुआरों की मौत के मामले को कूटनीति के स्तर पर इसे सुलझाने के लिए इटली के उप विदेश मंत्री ने भारतीय विदेश मंक्षालय के अधिकारियों से मुलाकात की है.

उप विदेश मंत्री स्ताफन दी मिसतुरा के साथ आए पाँच सदस्यों के दल ने विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर से मुलाकात की.

विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात के बाद इटली के उप विदेश मंत्री स्ताफन दी मिसतुरा ने कहा कि घटना हुई है, इससे इंकार नही किया जा सकता, पर ये घटना आंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई है. धटना की परिस्थितियों के सही विश्लेषण और जाँच की जरूरत है और वो अब केरल का रूख कर रहे हैं.

इतालवी उप विदेश मंत्री ने कहा कि इस मसले को ठीक तरीके से हल किया जाना चाहिए.

अलग-अलग रुख

भारत की विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने कहा कि इटली ने घटना पर खेद जताया है.

उन्होंने कहा कि जहाँ तक कानून की बात है, भारत और इटली का अलग-अलग रुख है.इस समय दोनो अभियुक्त भारतीय जमीन पर हैं और भारतीय अदालत को ही उन पर फैसला करना है. जहाँ तक भारत का सवाल है , हम भारतीय कानून का पालन करेंगें और कानून अपना काम करेगा.

पर भारत ने इटली को भरोसा दिलाया है कि भारतीय कानून पूरी तरह सक्षम और निष्पक्ष है.

इससे पहले, मंगलवार को केरल की एक अदालत ने भारतीय मछुआरों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराए गए जहाज के सदस्यों को दो हफ़्ते के लिए हिरासत में भेज दिया.

इटली का कहना है कि इन दोनों को भारत में सजा नहीं मिलनी चाहिए, इनके खिलाफ इटली के कानून के हिसाब से मुकदमा चले.

क्योंकि जहाज पर इटली का झंडा लगा हुआ था और यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से जा रहा था. उसके मुताबिक यह जहाज भारतीय सीमा से 32 नॉटिकल मील दूर था.

इटली का ये भी का कहना है कि मछुआरों की नाव ने बहुत ही खराब व्यवहार किया था और बार बार अपील करने के बाद भी वे नहीं माने. मंत्रालय का कहना है कि अधिकारियों ने सिर्फ चेतावनी देने के लिए हवा में गोलियां चलाईं.

लेकिन भारत का कहना है कि गार्डों ने निहत्थे लोगों पर हमला किया है और चूंकि ये हादसा भारत के अधिकार क्षेत्र में हुआ है, इसलिए भारतीय क़ानून प्रक्रिया का ही पालन किया जाएगा.

एक करोड़ का मुआवजा

इस बीच, गोलीबारी में मारे गए मछुआरों के एक परिवार ने मंगलवार को मुआवजे के लिए केरल उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

याचिका में मृतकों के परिवार ने मांग की है कि जब तक जहाज़ की कंपनी एक करोड़ रुपये मुआवजा अदा नहीं किया जाता तब तक अदालत मालवाहक जहाज को कोच्चि छोड़ने की अनुमति नही दी जानी चाहिए..

ये याचिका वकील विन्सेंट और कोल्लम डाइअसिस की ओर से दायर की गई है. गोलीबारी में मारा गया मछुआरा गेलास्टीन धार्मिक संगठन (कोल्लम डाइअसिस) से जुड़ा है.

मछुआरों के कई समूहों ने मंगलवार को कोल्लम के जिलाधीश कार्यालय और राजधानी में विरोध-प्रदर्शन किया.

प्रदर्शनकारियो की ये भी माँग थी कि जहाज के कप्तान को भी गिरफ्तार किया जाना चाहिए.

महत्वपूर्ण है कि इटली के मालवाहक जहाज के चालक दल के सदस्यों ने 15 फरवरी को अलाप्पुझा के तट पर दो भारतीय मछुआरों आजेश बिनकी और जलास्टीन पर कथित तौर पर इसलिए गोली चलाई क्योंकि उन्हें लगा कि ये मछुआरे समुद्री लुटेरे हैं.

सोमालिया और अदन की खाड़ी में जहाज़ों के अपहरण और समुद्री लुटेरों के हमले के बाद से हर जहाज़ में चालक दल के सदस्य अपने साथ बंदूकधारी भी रखने लगे हैं.

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