कश्मीर: पत्थरबाज़ों को आम माफी नहीं, विधानसभा में हंगामा

(फ़ाईल फ़ोटो)
Image caption साल 2010 में कश्मीर में हुए प्रदर्शनों में हज़ारों प्रदर्शनकारियों पर मामले दर्ज किए गए है. (फ़ाईल फ़ोटो)

भारत प्रशासित कश्मीर में सड़कों पर प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाज़ी करने वाले प्रदर्शनकारियों के लिए आम माफी योजना खत्म कर दी गई है. पिछले साल अगस्त में शुरू किए गए इस योजना के खत्म किए जाने के बाद 2700 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई होनी तय है.

जम्मू और कश्मीर के कानून मंत्री मुहम्मद सागर ने बीबीसी को बताया, “हम माफी योजना को लागू तो नहीं कर पाए पर करीब 1500 लड़कों को प्रभावित कर रहें 200 मामलों की समीक्षा कर रहें है. उन्हें दिसंबर तक कुछ राहत मिल सकती है.”

कश्मीर में साल 2010 में लंबे चले भारत विरोधी प्रदर्शन के बाद ये योजना राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ईद के तोहफे के तौर पर शुरू की थी.

राज्य में आरोपी युवाओं के लिए माफी योजना लागू करने में हो रही देरी का 87 सदस्यों वाले कश्मीर विधानसभा में कड़ा विरोध किया जा रहा है. विधानसभा में सालाना बजट के लिए बहस हो रही है.

आरोप

विपक्षी दल पीडीपी की नेता महबूबा मुफ़्ती ने राज्य सरकार पर भारत विरोधी भावनाएं भड़काने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा, “पिछले साल सरकार ने ऐलान किया था कि वो ईद का तोहफा बांट रहे है, लेकिन आज उन्होंने माफी योजना वापस ले ली. ये एक क्रूर मजाक है.”

विपक्ष के आरोपों पर एक लिखित जवाब में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा है कि 2700 आरोपियों में से किसी को भी माफी नहीं दी जा सकी है.

सरकारी आंकड़ो के अनुसार इस योजना को खत्म किए जाने से दक्षिणी जिला पुलवामा सबसे ज्यादा प्रभावित होगा. यहां एक हजार से ज्यादा लड़कों पर मुकदमें चलाए जा रहें है. दूसरा सबसे प्रभावित होने वाला शहर उमर अब्दुल्ला का गृहनगर गंदरबल है. गंदरबल में करीब 250 युवाओं पर अलग अलग आरोप है.

कश्मीर के दूसरे जिलों में भी युवाओं पर अलग अलग मामले दर्ज है.

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक युवा प्रदर्शनकारी ने बताया, “मेरा करियर खत्म हो गया है. मै अब किसी कॉलेज में एडमिशन नहीं ले सकता. मुझे अब पासपोर्ट नहीं मिलेगा और सबसे बुरी बात ये है कि मुझे सरकारी नौकरी नहीं मिल सकती.”

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