भारत में शरिया-समर्थन में संसद घेरो आंदोलन

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Image caption कई भारतीय मुसलमान नेताओं ने कहा कि उन्होंने अंजुम चौधरी का नाम नहीं सुना है

भारत में इस्लामी शरिया कानून लागू करने की मांग को लेकर लंदन का एक इस्लामी चरमपंथी संगठन संसद को घेरने की तैयारी में है.

इस कार्यक्रम का आयोजन तीन मार्च को किया जाना है.

मार्च के आयोजनकर्ताओं में से एक हैं लंदन में रहने वाले चरमपंथी नेता अंजुम चौधरी जिनका ताल्लुक भारत से है. उन्हें भारतीय अधिकारियों की हामी मिलना मुश्किल दिख रहा है.

तीन मार्च को इस घेराव को आयोजित करने का कारण ये है कि इसी दिन ओस्मानिया सल्तनत का अंत हुआ था.

अंजुम चौधरी ब्रिटेन में अपने तीखे भाषणों और ओसामा बिन लादेन का समर्थन के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने 'अल-मोहाजरीन' नाम के चरमपंथी संगठन की स्थापना की थी. वो ईराक और अफगानिस्तान पर हुए हमलों में ब्रिटेन के शामिल होने के कट्टर विरोधी रहे हैं.

भारतीय मुसलमान नेताओं ने इस घोषणा की कड़ी निंदा की है और कहा है कि शरिया संसद घेरने से नहीं, मोहब्बत से फैलता है.

कुछ मुसलमान नेता इसे उत्तर प्रदेश के चुनाव के वक मुस्लिम वोटों को बांटने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं.

अपनी वेवसाइट शरिया-फॉर-हिंद डॉट कॉम में अंजुम चौधरी ने इस घेराव के कार्यक्रम का भी जिक्र किया है.

उधर बेवसाइट और इस मार्च की शिकायत पर दिल्ली उच्च-न्यायालय ने पुलिस से कहा था कि वो इस मार्च को नहीं होने दे.

अभी ये साफ़ नहीं है कि भारत में इस संगठन के समर्थन में कितने लोग सड़क पर आएँगे, लेकिन चौधरी भारतीय समर्थकों का नाम बताने को तैयार नहीं हैं.

उनके मुताबिक ऐसा करने पर सरकार उन्हें परेशान कर सकती है.

भारतीय प्रणाली स्वीकार नहीं

लंदन से चौधरी ने बीबीसी को बताया कि उन्हें दिल्ली पुलिस की ओर से फोन गया था, और उन्होंने पुलिस से कहा कि वो उन्हें और भारतीय अदालतों को स्वीकार नहीं करते.

उन्होंने कहा, “इसी पुलिस ने मुसलमानों के साथ भारत में भेदभाव किया है.” उन्होंने गुजरात दंगों और कश्मीर का जिक्र किया.

अंजुम चौधरी का ताल्लुक भारत से है. उनकी माँ अमृतसर की रहने वाली थीं. वो कहते हैं कि भारत का बंटवारा नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि दुनिया भर के मुसलमान आपस में जुड़े हुए हैं.

चौधरी कहते हैं, “आज हम 55 देशों में बंटे हुए हैं और कहीं भी शरिया कानून लागू नहीं है.”

कार्यक्रम के मुताबिक दो मार्च को एक गुप्त जगह पर पत्रकारवार्ता होगी. उसके बाद तीन मार्च को लोग संसद की ओर मार्च करेंगे.

कार्यक्रम को लेकर इंडिया इस्लामी रिसर्च सेंटर के रिसेप्शन से एक व्यक्ति ने बताया कि इस रैली को लेकर कोई बुकिंग नहीं की गई है. उधर ऐसा भी कहा जा रहा है कि पुलिस ने सभी होटलों को इस मार्च से जुड़ी किसी भी बुकिंग करने से मना किया है.

शरिया-फॉर-हिंद वेबसाइट की शुरुआत वर्ष 2011 के अंत में हुई थी और चौधरी के मुताबिक इसे दो हफ्तों में ही 20 लाख तक हिट्स मिल चुके हैं.

चौधरी ने कहा, “ये वेवासाइट भारत को ध्यान में रखकर बनाई गई है. गोधरा दंगों के दस साल हो गए हैं और भारत में अभी चुनावी माहौल है.”

चौधरी के अनुसार वो समर्थन के लिए मुसलमान संगठनों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं क्योंकि वो भारतीय मुख्यधारा से पूरी तरह जुड़ चुके हैं. लेकिन उन्हें जमीन से जुड़े लोगों के समर्थन का भरोसा है.

चौधरी कहते हैं कि अगर उन्हें दिल्ली नहीं आने दिया जाता तो वो सैटेलाइट के माध्यम से सीधे लोगों से बात करेंगे.

प्रतिक्रिया

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Image caption दिल्ली उच्च-न्यायालय ने पुलिस से कहा था कि वो इस मार्च को नहीं होने दे

अंजुम चौधरी का नाम कई मुसलमान नेताओं ने नहीं सुना है. मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य जफरयाब जिलानी कहते हैं कि जोर जबरदस्ती से लोगों को शरिया का पालन करने की बात इस्लाम नहीं करता. लेकिन वो इस घोषणा को उत्तर प्रदेश चुनाव से भी जोड़ते हैं.

जफरयाब जीलानी कहते हैं, “उत्तर प्रदेश में चुनाव के वक्त ऐसा वक्तव्य मुसमानों के वोटों को बांटने की साजिश है. ऐसी तंजीम जो मुसलमान वोटों का बिखराव चाहती है, उसने ये बयान दिलवाया है.”

उधर मुंबई स्थित धार्मिक नेता अब्दुर्रहमान अंजारिया कहते हैं, “अगर हिंदुस्तान में इस्लामी हुकूमत आनी है तो वो प्यार मोहब्बत से आ सकती है, धरना प्रदर्शन से नहीं.”

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