मतभेद छोड़ सभी ट्रेड यूनियन हड़ताल पर एकजुट

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Image caption चाहे आरएसएस हो या वामपंथी दल, सभी के ट्रेड यूनियन नेता एक मंच पर आ रहे हैं. फाइल फोटो

कई वर्षों में पहली बार वैचारिक मतभेद को पीछे छोड़कर देश के सभी मजदूर संगठनों ने मंगलवार को यूपीए सरकार के खिलाफ हड़ताल का ऐलान किया है.

यह देशव्यापी हड़ताल केंद्र सरकार की 'कर्मचारी-विरोधी' नितियों और बढ़ती महंगाई के विरोध में तथा कुछ और मांगों को लेकर है.

आरएसएस हो या वामपंथी दल, शिवसेना हो या मुस्लिम लीग -- सभी ट्रेड यूनियन नेता एक मंच पर आ रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर यह हड़ताल करने जा रहे हैं.

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महासचिव गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि पहली बार सभी प्रमुख 11 ट्रेड यूनियनें हड़ताल में हिस्सा ले रही है.

उन्होंने कहा कि देश में वित्तीय संकट के चलते सभी ट्रेड यूनियन एक ही मंच पर आने के लिए मजबूर हो गए हैं.

उन्होंने कहा, ''इतिहास बदलता है, दुनिया बदलती है, सरकार जब मनमानी करती है, सरकार जब जुल्म करती है जब महंगाई की हालत इतनी खराब होती है, तब सभी मजदूर इकट्ठा होते हैं.''

भारतीय मजदूर संघ के महासचिव बैजनाथ राय का कहना है कि ऐसा केवल केंद्र में ही नहीं, राज्यों में भी है कि सभी श्रमिक नेता एक साथ हैं.

उन्होंने कहा, ''केरल में मुस्लिम संगठन का श्रमिक संगठन हमारे साथ है. तमिल नाडू में डीएमके और एआईएडीएमके के श्रमिक संगठन साथ साथ हैं. महाराष्ट्र में कांग्रेस और शिवसेना के श्रमिक संगठन साथ है.''

कैसे हुए साथ

क्या कारण है कि यह सभी श्रमिक संगठन एक मंच पर आ पाए हैं? बैजनाथ राय कहते हैं, ''ट्रेड यूनियन का काम होता है कि वो मजदूरों के हित के लिए काम करे न कि किसी राजनीतिक दल. जो हमारी मांगे हैं उससे राज्य सरकारे भी संबंधित हैं और केंद्र सरकार भी.''

महंगाई और कर्मचारियों की नीतियों के इलावा न्यूनतम वेतन न देना, ठेके पर नौकरी पर रखना और असंगठित मजदूरों के कानून का पालन न होना भी मांगों में शामिल है.

हड़ताल करने वाले नेताओं का आरोप है कि सरकार ने जो अब तक श्रम कानून बनाया है उसे स्वयं सरकार ही तोड़ रही है.

उनका यह भी आरोप है कि श्रम कानून को भी प्रबंधन के पक्ष में बना दिया गया है और मजदूरों की सुनने वाला कोई नहीं है.

हड़ताल को रोकने के सरकार के सभी प्रयास अभी तक विफल साबित हुए हैं. हड़ताल से बैंकों और वित्तीय संस्थान समेत कई सेवाओं पर असर पड़ेगा.

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