कश्मीर में पत्रकारों की ‘आज़ादी’ की लड़ाई

 बुधवार, 29 फ़रवरी, 2012 को 03:20 IST तक के समाचार

पत्रकारों का कहना है कि जब तक स्पीकर अपना बयान वापस नहीं लेते, वे विधानसभा का बहिष्कार जारी रखेंगें

भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारों ने उन पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों के खिलाफ एक विरोध मुहिम जारी की है.

उनका कहना है कि उन्हें मंत्रियों के भ्रष्टाचार से जुड़ी ख़बरें सामने लाने से रोका जा रहा है.

इस बीच भारतीय प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष ने इस मामले में जांच की मांग की है.

सैंकड़ों पत्रकारों ने विधानसभा के बाहर एक धरना दिया.

दरअसल स्पीकर मुहम्मद अकबर लोन के एक ‘आपत्तिजनक’ बयान दिए जाने से घाटी के पत्रकार काफी नाराज़ हैं.

स्थानीय पत्रकार तरुण उपाध्याय ने कहा, “स्पीकर ने कहा कि प्रेस का नियंत्रण उनके हाथों में है और पत्रकारों को अपनी ख़बर के सूत्रों की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.”

मांग

पत्रकारों की मांग है कि स्पीकर अपना बयान वापस लें और इस वक्तव्य को विधानसभा के रिकॉर्ड से मिटाया जाए.

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पत्रकारों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी कोशिशें नाकाम रहीं.

पत्रकारों का कहना है कि जब तक स्पीकर अपना बयान वापस नहीं लेते, वे विधानसभा का बहिष्कार जारी रखेंगें.

विश्लेषकों का कहना है कि स्पीकर का ये कहना कि हर खबर के पीछे के सूत्र को सार्वजनिक किया जाए, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है.

ग़ौरतलब है कि भारत प्रशासित कश्मीर में पत्रकारों पर पिछले कई सालों से कई प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं.

भारतीय प्रेस काउंसिल ने ये मुद्दा कई बार अंतरराष्ट्रीय गुटों के समक्ष उठाया है. इसके अलावा इंटरनेश्नल फेडरेशन ऑफ़ जर्नलिस्ट ने भी इस मुसले पर चिंता जताई है.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.