प्रचार करते-करते थक गए हैं नेता

 सोमवार, 27 फ़रवरी, 2012 को 22:57 IST तक के समाचार
मुलायम सिंह यादव

मुलायम सिंह यादव रैली में बहुत कम बोले

उत्तर प्रदेश में अब अंतिम चरण का चुनाव प्रचार चल रहा है, लेकिन लगता है कि प्रचार करते-करते सारी पार्टियां थक गई हैं.

हो भी क्यों नहीं चुनाव शुरू हुए महीना होने वाला है. हालांकि कोई पार्टी यह मानने को शायद ही तैयार होंगी, लेकिन प्रचार में वो दम नहीं दिख रहा है. पार्टी तो पार्टी, नेता भी थके हुए से दिख रहे हैं.

बिजनौर में 27 फरवरी को समाजवादी पार्टी की रैली में मुलायम सिंह यादव भी बेहद थके हुए दिखे. रैली में भी़ड़ थी लेकिन मुलायम को सुनने के लिए आए लोगों को निराशा हुई जब मुलायम कुछ ही देर बोल पाए.

बाद में मालूम हुआ उनके दांत में दर्द था.

दलितों-मुस्लिमों में उत्साह

शरीफ़ अहमद

मुस्लिम मतदाताओं में चुनाव को लेकर काफ़ी उत्साह है

इस इलाक़े में अगर चुनाव को लेकर उत्साह है तो वो दलितों में और मुस्लिमों में.

दलित बस्तियों में चुनाव पर जमकर चर्चा होती है और हो भी क्यों नहीं. मायावती पहली बार यहीं से चुनाव जीतकर सांसद जो बनीं थीं.

हालांकि अब वो इस इलाक़े से चुनाव नहीं लड़ती हैं लेकिन उनके नाम का दबदबा दलित बस्तियों में अभी भी पहले जितना ही है. मुसलमानों को मायावती से तो प्रेम नहीं है, वो बदलाव चाहते हैं.

बिजनौर का काज़ीपाड़ा इलाक़ा मुस्लिम बहुल है. कुछ तो खुलकर सपा का समर्थन करते हैं लेकिन कई लोग कहते हैं कि वो बदलाव चाहते हैं. काज़ीवाड़ा की चौपाल पर बैठे शरीफ अहमद कहते हैं कि यहां मुकाबला बसपा और सपा का है लेकिन जीत सपा की ही होगी.

उनका कहना था, "मुलायम सिंह यहां समय नहीं दे पाए, लेकिन हम तो उनको ही वोट देंगे क्योंकि पिछले पांच साल में कोई काम नहीं हुआ. बिजली की भयंकर समस्या है. रमज़ान के समय तक बिजली नहीं थी."

युवा मतदाता

मोहम्मद इकबाल

मोहम्मद इकबाल सुविधाएँ न मिलने से नाराज़ हैं

बदलाव तो युवा समुदाय भी चाहता है लेकिन वो बताता नहीं कि वोट किसे देगा. मोहम्मद इकबाल की उम्र 20 साल है.

वो पहली बार वोट देंगे लेकिन कहते हैं कि उनके लिए कोई मुद्दा नहीं है.

नाराज़गी भरे लहज़े में वो कहते हैं, "मायावती जी ने बहुत विकास किया लेकिन सिर्फ अपनी बिरादरी के लिए. हमारे लिए कुछ नहीं हुआ. राशन कार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने तक कोई सुविधा नहीं दी गई हम लोगों को. हम उतने ही परेशान हैं. अब कुछ दिनों से बिजली पानी की भी समस्या हो रही है."

तो वोट किसको देंगे. इकबाल कहते हैं- देंगे किसी को लेकिन हमको किसी से उम्मीद नहीं है. वोट डालना हमारा कर्तव्य है इसलिए वोट तो हम ज़रुर देंगे.

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