'2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं'

Image caption सरकार का इरादा दूरसंचार लाइसेंस रद्द करने के फैसले को चुनौती देने का नहीं है.

2 जी स्पेक्ट्रम मामले में भारत सरकार के दूरसंचार सचिव का कहना है कि सरकार 122 दूरसंचार लाइसेंस रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देगी.

लेकिन संकेत दिए हैं कि सरकार पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर सकती है.

उद्योग चैंबर फिक्की के एक कार्यक्रम के दौरान दूरसंचार सचिव आर. चंद्रशेखर ने पत्रकारों से कहा, “हम लाइसेंस रद करने के फैसले को चुनौती देने पर विचार नहीं कर रहे हैं. इस सप्ताह के अंत तक हम इस बारे में कोई महत्वपूर्ण फैसला कर सकते हैं. हमारे सभी कानूनी विकल्प खुले हुए हैं.”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो फरवरी को दिए गए फैसले के बाद से पुनरीक्षण याचिका दायर करने के लिए सरकार के पास एक महीने का समय है.

दूरसंचार सचिव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कई मुद्दे सामने आए हैं और इसके लिए सावधानीपूर्वक विश्लेषण की जरूरत है. मुद्दों का न केवल विश्लेषण करने की जरूरत है बल्कि उन कानूनी विकल्पों पर भी गौर करने की जरूरत है जिस पर हम कदम उठा सकते हैं.

टाटा की याचिका

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से प्रभावित टाटा टेलीसर्विसेज लिमिटेड ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में उसे आवंटित तीन सर्किल के 2जी स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद करने के फैसले की पुनरीक्षण याचिका दायर की है.

यह याचिका उच्चतम न्यायालय के दो फरवरी के 2जी लाइसेंस रद करने के फैसले के करीब एक माह बाद दायर की गई है.

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

इससे पहले, फरवरी में 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले के मामले में अहम फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 11 कंपनियों के सभी 122 लाइसेंसों को अवैधानिक ठहराते हुए रद्द कर दिया था.

लाइसेंस आवंटन रद्द किए जाने से प्रभावित कंपनियां हैं - यूनीनॉर ( यूनिटेक औऱ नॉर्वे की यूनीनॉर की सांझा कंपनी), लूप टेलीकॉम, सिस्टेमा श्याम ( श्याम और रुस की सिस्टेमा की सांझा कंपनी), एतिसलात डीबी ( स्वान और यूएई की एतिसलात की सांझा कंपनी), एस-टेल, वीडियोकॉन, टाटा और आईडिया.

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