सत्यजीत रे के जादुई कैमरे का आकर्षण

ऊंगलियों पर किताबों के सफे उलटने-पलटने का स्पर्श, पेंसिल या कलम से पन्ने के कोने में उकेरी कुछ पंक्तियाँ, कमरे में अधलेटे हुए अपनी पसंदीदा पर अधूरी छूटी किताब को खत्म करने की उत्सुकता....किताब और पाठक का रिश्ता वाकई बड़ा प्यारा होता है.

पुस्तकों की जगह मोबाइल और कम्प्यूटरों पर लेख और यहाँ तक कि किताबें पढ़ने का चलन बढ़ने लगा है. पर किताबों के कद्रदान कम नहीं हैं.

दिल्ली के प्रगति मैदन पर चल रहे 20वें विश्व पुस्तक मेले में भीड़ को देखकर तो यही लगता है.

विशाल मैदान पर फैले कई हॉल और हॉल में अलग-अलग विषयों पर करीने से सजी रंग बिरंगी किताबें-मानो हर आने वाले को आमंत्रण दे रही थीं.

एक स्टॉल पर कुछ ज्यादा ही भीड़ थी. मैने भी वहाँ का रुख़ किया तो पता चला कि वहाँ एक जनाब स्टॉल लगाकर कुरान मुफ़्त में बाँट रहे हैं. मुफ्त बाँटने का मकसद जब पूछा तो उन्होंने बताया, हम चाहते हैं कि लोग कुरान को समझें, लोगों को कई गलतफहमियाँ हैं वो दूर हों.

सुबह पर्याप्त संख्या में प्रतियाँ नहीं थी तो लोग दोपहर में दोबारा आने को भी तैयार थे. उसी स्टॉल से कुछ ही दूरी पर वेदों का स्टॉल था, साथ में सत्यार्थ प्रकाश भी- केवल 10 रुपए में.

कुरान और सत्यजीत रे का जादुई कैमरा

Image caption मेले की एक स्टॉल पर कुरान मुफ़्त में बाँटी जा रही थी.

इस बार पुस्तक मेले का मुख्य थीम रखा गया है भारतीय सिनेमा..जाहिर है सिनेमा प्रेमियों के लिए पुस्तक मेले में कुछ खास है...और ये खासियत है स्टॉल में रखा एक पुराना टू-सी एरीफ्लेक्स कैमरा, जो भारतीय सिनेमा के कई गौरवशाली लम्हों का गवाह रह चुका है.

यूँ तो इसे छूने की मनाही है लेकिन सिने प्रेमी कहाँ मानते हैं.....ये वही कैमरा है जिससे सत्यजीत रे, मृणाल सेन, रित्विक घटक और उत्तर कुमार ने कभी अपनी परिकल्पना को सिनेमा के पर्दे पर उतारा था.

सत्यजीत रे की गोपिगाइन बाघा बाइन और घरे बाहिरे जैसी फ़िल्मों के शॉट इसी कैमरे से होकर गुज़रे थे. तो मृणाल सेन की मृग्या भी इस जादुई कैमरे की सृजनशीलता है.

1976 में आई फिल्म मृग्या से ही मिथुन चक्रवर्ती ने अपने करियर की शुरुआत की थी.और उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था.

सिनेमा से जुड़े इस पविलियन के बाहर पुराने जमाने का बायस्कोप रखा है तो अंदर सिनेमा के दिग्गजों की किताबें और ब्लैक एंड वाइट पोस्टर हैं.

पर यहाँ की किताबों को आप केवल देख और छू भर ही सकते हैं....इनकी बिक्री की इजाजत नहीं है. शायद इसलिए बहुत से पुस्तक प्रेमी वहीं अंदर सोफ़े पर बैठकर ही किताबों के पन्ने पलटते नजर आए.

विषय अलग अलग जरूर थे पर पुस्तक मेले में किताबों के शौकीनों की कमी नजर नहीं आई. विश्व पुस्तक मेला चार मार्च तक चलेगा.

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