सड़क, पानी, बिजली से ज्यादा रोटी की चिंता

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बरेली शहर में बहुत से लोग ऐसे है जिन्हे सड़क, बिजली और पानी से ज्यादा रोजी की चिंता खा रही है.

फरजंद की उम्र चालीस के करीब होगी लेकिन चेहरे पर उभर आई हड्डियां गरीबी साफ दिखाती हैं.

चेहरे पर रोष और झल्लाहट में वो दुकानदार से संभवत काम मांग रहे हैं लेकिन मेरा माइक देखते ही पूछते हैं आपको क्या चाहिए.

सवाल पूछते ही मानो सारा गुस्सा मुंह पर आ जाता है. फरजंद आठवीं पास करने के बाद बिजली मिस्त्री का काम करते थे लेकिन पिछले पांच वर्षों में कई छोटे उद्योग धंधों के बंद होने के कारण उनकी रोज़ी ख़राब हो गई है.

वो कहते हैं, ‘‘सड़क, पानी, बिजली से हमको मतलब नहीं. हमारी तो रोज़ी रोटी ही ख़राब कर दी सरकार ने. बहुत मेहनत से काम सीखे थे बिजली का. ठीक चल रही थी जिंदगी. फिर सब फैक्ट्रियां बंद होने लगीं. हमारा काम ही रुक गया. भूखे मरने की नौबत आ गई है हमारी.’’

फरज़ंद बताते हैं कि वो ठेकेदारों के पास भी काम करते थे जहां उन्हें पूरे पैसे नहीं मिलते थे और असंगठित मज़दूरों की मदद कोई नहीं करता.

Image caption इमरान को लगता है कि उनकी जिंदगी में वोट डालने से कोई बदलाव नहीं आएगा.

तो फिर अब गुज़ारा कैसे चलता है, फरज़ंद की आंखों की कोर से आंसू निकलते निकलते रुक जाते हैं. वो कहते हैं, ‘‘हम शादियों में जाते हैं खाना बनाने का काम करते हैं. अपना काम तो बिल्कुल नहीं रहा हमारे पास. दो ही बच्चे हैं. चाहते थे कि पढ़ लिख जाएं. शादियों में खाना बचता है तो वो ले आते हैं. कई दिन वही खाकर रहे हैं.’’

गुजारे की जद्दोजहद

लेकिन क्या गुज़ारे लायक कमाई हो जाती है, ‘‘अब समझो हो ही जाती है. बच्चे पढ़ लिख जाएं. और कोई उम्मीद नहीं है. बहनजी की सरकार के बाद तो और बर्बाद हो गए.’’

फरज़द अकेले नहीं हैं. बरेली में धंधे बंद होने से कई मज़दूरों की कमोबेश यही हालत हुई है. ज़री का काम करने वाले इमरान खान कहते हैं कि उनकी ज़िंदगी में पांच साल में तो क्या दस साल में कुछ नहीं बदला.

तो क्या वो वोट देने जाते हैं, ‘‘वोट तो देते ही हैं लेकिन इसका कुछ होता नहीं है. हम तो शौकिया वोट डालने जाते हैं. तफ़रीह के लिए जाते हैं वोट डालने. हमारी ज़िंदगी में कोई बदलाव थोड़े न होगा.’’

बरेली में अलग अलग धंधों में लगे कई मज़दूरों से मुलाक़ातों में यही लगा कि आसपास की कई छोटी मोटी फैक्ट्रियों के बंद होने का उनके जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है.

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