अमरीकी संसद में गुजरात दंगों पर प्रस्ताव

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Image caption अमरीकी संसद में पेश प्रस्ताव गैर बाध्यकारी है

एक अमरीकी सांसद कीथ एलिसन ने गुजरात दंगों की दसवीं बरसी पर पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए एक प्रस्ताव अमरीकी कॉंग्रेस में रखा है. इस प्रस्ताव में कहा गया है कि गुजरात सरकार राज्य में धार्मिक स्वतंत्रता बहाल करे.

इस प्रस्ताव को संसद की विदेशी मामलों की समिति को भेजा गया है. "गुजरात में दुर्भाग्यपूर्ण धार्मिक दंगों के दास साल" पर लाया जाने वाला यह प्रस्ताव गैर बाध्यकारी है.

अमरीकी संसद में पेश होने वाले ज़्यादातर दूसरे प्रस्तावों के विपरीत इस प्रस्ताव का कोई सह-प्रायोजक नहीं है. यह प्रस्ताव अमरीकी संसद में "उचित कार्रवाई" के लिए भेजा गया है.

इस प्रस्ताव में 2002 के दंगो की बात की गई है. इस प्रस्ताव में गोधरा के ट्रेन हादसे में जिन लोगों की जानें गईं थी उन लोगों के परिजनों के कष्ट का भी ज़िक्र है.

इस प्रस्ताव में पत्रकारों और मानवाधिकार के लिए काम करने वाले संस्थाओं द्वारा सामने लाई गईं उन ख़बरों पर चिंता जताई गई है जिनमे गुजरात के हुई हिंसा के पीछे मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाये गए हैं.

अमरीकी सरकार ने साल 2005 में नरेंद्र मोदी को अमरीका का वीसा देने से इनकार कर दिया था.

प्रस्ताव का स्वागत

अमरीका में स्थित भारतीय अमरीकी मुस्लिम परिषद् ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है.

इस संगठन के अध्यक्ष शाहीन खतीब ने कहा "सांसद एलिसन का प्रस्ताव उन सभी लोगों को याद करने के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने गुजरात के भीषण धार्मिक दंगों में अपनी जाने गवां दीं." खतीब का यह भी कहना है कि इस प्रस्ताव के ज़रिए गुजरात पीड़ितों के लिए लड़ने वालों को बल मिलेगा. खतीब के अनुसार गुजरात में दस साल बाद भी दंगा पीड़ितों के साथ आर्थिक भेदभाव हो रहा है और उन्हें कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

भारतीय अमरीकी मुस्लिम परिषद् ने अमरीका में भारतीय-अमरीकियों से आग्रह किया है कि वो अपने-अपने सांसदों को इस प्रस्ताव का समर्थन करने के लिए अपील करें.

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