पटाखों और रंग के साथ लाल टोपी वालों का जश्न

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Image caption लखनऊ में समाजवादी पार्टी दफ्तर पर जीत का जश्न मनाया जा रहा है, सड़क के बीचो-बीच पटाखे फोड़े गए.

यूं तो राजधानी लखनऊ का राजनीतिक पारा हमेशा ही गरम रहता है, पर छह मार्च की सुबह आम सुबह नही थी.

मतगणना शुरु होने में अभी भी एक घंटे से भी ज्यादा का वक्त बाकी था, पर राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता अपने दल बल के साथ मतगणना स्थल राजकीय पालीटेक्निक के इर्द गिर्द मंडराने लगे थे.

हाँ, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में कुछ ज्यादा ही उत्साह नजर आ रहा था, उन्हें इस बात का अंदाजा पहले से ही था कि जब वोटिंग मशीने खुलेंगी तो वो कौन सी कहानी कहने वाली हैं.

समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता लाल टोपी के साथ झक सफेद कुर्ते पाजामें में चैनलों की गाड़ियों के आमने सामने इसलिए चक्कर पे चक्कर लगा रहे थे कि उन्हे भी कैमरे पर अपनी बात कहने का मौका मिल जाए.

इसी बीच, तेज कदमों के साथ दल-बल समेत कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी का आगमन हुआ. मैंने उनसे पूछा कि कितनी सीटें… जवाब मिला कि कम से कम सौ सीटें तो उनके पाले में आएंगी ही.

उन्हें शुभकामनाएं दी हीं थी कि मेरी नजर एक ऐसे व्यक्ति पर गई जो महात्मा गांधी का रुप धरकर मतगणना स्थल पर था, उन्होंने अपना नाम गांधी बताया, मैने पूछा असली या नकली, तो उन्होंने झ़ट से अपना दायां हाथ आगे बढ़ाया जिस पर खुदा था गांधी. उन्होंने कहा कि वो यहां पर सभी प्रत्याशियों के समर्थन में आए हैं.

ग्यारह बजे तक उत्तर प्रदेश की तस्वीर कुछ साफ होने लगी तो वहाँ घूम रहे समाजवादी पार्टी के छुटभैया नेताओं के सीने चौड़े होने लगें.

मैंने भी रुख किया समाजवादी पार्टी के मुख्यालय की ओर...

पटाखे और रंग

Image caption समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने जश्न मनाने के लिए 125 किलो का लड्डू बनवाया है.

असली जीत का जश्न तो यहाँ मनाया जा रहा था, सड़क के बीचो-बीच हजारों लड़ियों वाली चटाई के धमाके समर्थकों के जुनून को बयां कर रही थी. होली से पहले ही उड़ते गुलाल से आसमान रंगीन हो चला था.

पार्टी दफ्तर के ठीक सामने बने मंच पर 125 किलो का शुद्द देशी घी से बना लड्डू इस इंतजार में था कि अखिलेश यादव उसे अपने लोगों में बाटेंगे.

उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी बहुजन समाज पार्टी के दफ्तर तक जाने पर दिखा कि इस कार्यालय का हाल ठीक एक दिन पहले जैसा ही था.

किलेनुमा कार्यालय का गेट बंद, न कोई समर्थक और न ही कोई नेता.

अगर वहाँ कोई मौजूद था तो वो थे मीडिया चैनलों के लोग.

मीडिया कर्मी इस बात के लिए खुद को कोस रहे थे कि वो यहाँ आए ही क्यों और जब यहाँ कुछ हो ही नही रहा तो अपडेट भला क्या दें.

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