आरोप-प्रत्यारोप के बीच ताजपोशी की तैयारी

मुलायम सिंह यादव इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अखिलेश यादव ने कहा है कि मुलायम सिंह ही अगले मुख्यमंत्री होंगे

उत्तर प्रदेश में अपने दम पर बहुमत हासिल करने के बाद अब ये चर्चा तेज़ है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा- मुलायम सिंह यादव या अखिलेश यादव.

लखनऊ से बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी ने बताया है कि पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से भारी दबाव है कि अखिलेश यादव सरकार की बागडोर संभालें.

लेकिन अखिलेश यादव ने संसदीय बोर्ड की बैठक के बाद दोहराया कि मुलायम सिंह यादव ही मुख्यमंत्री बनेगे.

वैसे समाजवादी पार्टी के विधायक दल की बैठक 10 मार्च को बुलाई गई है.

ज़्यादातर आकलनों से उलट समाजवादी पार्टी ने अपने दम पर बहुमत हासिल करते हुए चुनाव के बाद तमाम जोड़-तोड़ पर विराम लगा दिया है.

मायावती के तर्क

लेकिन बाकी पार्टियों के लिए ये मुश्किल समय है. मुश्किल हार को पचाने का और उसके विश्लेषण का. उत्तर प्रदेश के नतीजों पर भारतीय राजनीति की दो प्रमुख महिला चेहरों ने बुधवार को मोर्चा संभाला.

एक ओर जहाँ लाख कोशिशों के बावजूद मायावती अपनी निराशा पर काबू नहीं पा सकीं, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी की हार को स्वीकार करते हुए संगठन में कमी की बात स्वीकार की.

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती के लिए इतनी बड़ी हार को पचाना आसान नहीं था. मीडिया के सामने अपना बहादुरी वाला चेहरा पेश करने की उन्होंने भरपूर कोशिश की और हार के लिए मुस्लिम आरक्षण पर कांग्रेस की नीतियों और भाजपा के विरोध को ज़िम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, ''कांग्रेस की कमजोर स्थिति और आरक्षण के मुद्दे पर ऊंची जातियों और पिछड़े वर्गों का वोट भाजपा को मिलने की संभावना को देखते हुए मुस्लिम समाज के लोगों ने न कांग्रेस को वोट दिया, न बसपा को. लगभग 70 प्रतिशत मुस्लिम समाज ने अपना एकतरफा वोट सपा उम्मीदवारों को दे दिया.''

403 सीटों में से सिर्फ़ 80 सीटें हासिल करने वाली मायावती ने ये मानने से भी इनकार किया कि उनकी सरकार के ख़िलाफ़ कोई रोष था.

समाजवादी पार्टी की पुरानी कार्यशैली का हवाला देते हुए उन्होंने चुटकी भी ली और कहा कि प्रदेश की जनता बहुत जल्दी ही सपा की कार्यशैली से तंग आकर बसपा के सुशासन को जरूर याद करेगी.

कांग्रेस के लिए सबक

दूसरी ओर राहुल गांधी की तरह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी माना है कि पांच राज्यों में हुए चुनाव पार्टी के लिए एक सबक हैं लेकिन उन्होंने इससे इनकार किया कि चुनाव के नतीजों का असर केंद्र की यूपीए सरकार पर नहीं पड़ेगा.

पार्टी संगठन की कमज़ोरी की बात स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, "यूपी में संगठन कमजोर है, यही मुख्य मुद्दा है. इसके अलावा यूपी की जनता बहुजन समाज पार्टी से बहुत नाराज थी और उनके सामने विकल्प समाजवादी पार्टी थी."

उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश में गलत उम्मीदवारों का चयन हार की वजह रही. पंजाब में हमें बेहतर उम्मीदें थी लेकिन पीपीपी ने अकाली की वजह से कांग्रेस को नुकसान पंहुचाया. गोवा में मतदाता हमसे खुश नहीं थे इसलिए उन्होंने स्वाभाविक तौर पर हमारे खिलाफ वोट दिया."

कांग्रेस अध्यक्ष ने साथ ही ये दावा भी किया कि चुनाव के नतीजों का केंद्र की सरकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि ये नतीजे यूपीए सरकार को नुकसान पंहुचाएंगे. हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि हम एक चुनाव जीते भी हैं."

सोनिया ने यह भी स्वीकार किया कि महंगाई एक वजह हो सकती है और जो भी ग़लतियाँ हुई हैं, उसे सुधारने की कोशिश की जाएगी.

संबंधित समाचार