उत्तराखंड में सरकार के लिये जोड़तोड़

 बुधवार, 7 मार्च, 2012 को 18:25 IST तक के समाचार

मुख्यमंत्री खंडूरी को हार का सामना करना पड़ा है

उत्तराखंड में खंडित जनादेश इस बात की ओर इशारा है कि मतदाता बदलाव चाहता है और विकल्प की तलाश में है लेकिन उसका स्वरूप स्पष्ट नहीं है.

कांग्रेस और बीजेपी दोनों लगभग बराबर पर हैं और किसी भी एक दल को बहुमत नहीं मिलने के कारण बागी, निर्दलीय और क्षेत्रीय दलों की भूमिका बड़ी अहम हो गई है.

प्रदेश में ‘फोटो फिनिश' के साथ कांग्रेस 32 सीटें हासिल कर सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है और सत्ताधारी भाजपा उससे सिर्फ एक सीट कम 31 विधायकों के साथ दूसरे नंबर पर है.

दोनों ही दल समान रूप से सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और उनके मैनेजर 36 का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिये एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं.

इस बीच बीसी खडूरी ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है.

निर्दलीय दिल्ली में

खबर है कि कांग्रेस ने विधानसभा में जीतकर आए तीनों निर्दलीय विधायकों को दिल्ली ले जाया गया है.

मंत्रीप्रसाद नैथानी, हरीश दुर्गापाल और दिनेश धनै तीनों ही कांग्रेस के बागी नेता हैं जिन्हें टिकट नहीं मिला था और ये निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विधानसभा में पंहुचे हैं.

ऐसी खबरें हैं कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय बहुगुणा और सतपाल महाराज इन्हें अपने साथ लेकर दिल्ली गए हैं.

बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान के स्तर पर इन्हें मनाने की कोशिशें चल रही हैं.

हरीश रावत को मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में गिना जाता है

हालांकि मंत्रीप्रसाद नैथानी ने फोन पर कहा कि मैंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव नहीं जीता है और जैसा समर्थक कहेंगे मैं वैसा ही करूंगा.

अगर निर्दलीय कांग्रेस के साथ आ जाते हैं और उत्तराखंड क्रांति दल (पी) के एक विधायक का भी पार्टी को समर्थन मिल जाता है तो उसे 36 सीटों का सामान्य बहुमत मिल जाएगा.

जाहिर सी बात है कि इस समझौते में इन विधायकों के लिये मंत्रिपद पहली शर्त होगा.

कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र अग्रवाल ने दावा किया कि निर्दलीय उनके साथ हैं और बीएसपी का समर्थन भी उन्हें मिल रहा है.

उधर खबर है कि बीएसपी के तीनों विधायक भी दिल्ली में ही जमे हुए हैं. अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है.

प्रदेश में अपने खराब प्रदर्शन के बावजूद बीएसपी किंगमेकर की भूमिका में है.

हालांकि कांग्रेस पहला भरोसा निर्दलियों पर जता रही है.

खंडूरी का इस्तीफ़ा

उत्तराखंड के चुनाव प्रभारी और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने बुधवार को देहरादून में पार्टी के सभी विधायकों से बाकायदा एक-एक कर बंद कमरे में मुलाकात की है.

उत्तराखंड में सरकार बनाने को लेकर भाजपा के विरोधाभासी बयान आ रहे हैं

शुरुआत में मुख्यमंत्री खंडूरी और पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ने ये बयान दिया कि बीजेपी की ही सरकार बनेगी. लेकिन बाद में विरोधाभासी बयान भी आए.

पार्टी के वरिष्ठ नेता और नव-निर्वाचित विधायक अजय भट्ट ने मीडिया से कहा कि वे विपक्ष में बैठेंगे.

बीजेपी के एक और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र ने भी कहा कि वे सरकार बनाने के लिये ऐसा कोई गठजोड़ नहीं करेंगे.

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री खंडूरी की हार और पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री पद के कई दावेदारों के कारण पार्टी को सर्वसम्मत निर्णय लेने में भारी माथापच्ची करनी पड़ रही है.

इस बीच मुख्यमंत्री खंडूरी बुधवार शाम को राज्यपाल से मिलकर उन्हें अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है.

माना जा रहा है कि परंपरा के अनुसार राज्यपाल की तरफ से भी शायद पहले कांग्रेस को ही सरकार बनाने का न्यौता दिया जाएगा क्योंकि वो सबसे बड़ी पार्टी है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य मंगलवार को ही राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने के लिये कांग्रेस का दावा पेश कर चुके हैं.

बुधवार शाम ही देहरादून में कांग्रेस विधायक दल की भी बैठक होनी है.

संभावना है कि एक लाइन का प्रस्ताव पारित करके सोनिया गांधी को विधायक दल का नेता चुनने के लिये अधिकृत कर दिया जाएगा.

दिलचस्प ये है कि सरकार बनाने के साथ ही कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद के लिये भी तिकड़में और जोड़तोड़ शुरु हो गई है. पार्टी में जितने विधायक हैं, उनके कम से कम एक चौथाई तो मुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं ही.

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