इसराइली हमला: पत्रकार की गिरफ्तारी पर सवाल

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Image caption काजमी को सात मार्च को ज़ोरबाग स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया गया था.

राजधानी दिल्ली में इसराइली दूतावास की एक कार पर हुए हमले के मामले में पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी की गिरफ़्तारी पर सवाल उठने लगे हैं.

जहां एक ओर काज़मी के परिवार वालों का कहना है कि उन्हें इस पूरे मामले में फंसाया जा रहा है वहीं दिल्ली पत्रकार संघ का कहना है कि पुलिस हिरासत में काज़मी का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है और इस मामले की सख्ती से जांच कराई जानी चाहिए.

मोहम्मद अहमद काज़मी दिल्ली में एक ईरानी समाचार एजेंसी के लिए काम करते थे और माना जाता है कि इसराइल-फलस्तीन मामलों पर लिखते हुए उनके विचार अक्सर इसराइल के खिलाफ़ रहे हैं.

काजमी को सात मार्च को ज़ोरबाग स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया गया था. गिरफ़्तारी के बाद अदालत ने उन्हें 20 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है

'षड्यंत्र में शामिल'

काजमी की गिरफ़्तारी के विरोध में दिल्ली पत्रकार संघ की ओर से शुक्रवार को दिल्ली में की गई एक प्रेस वार्ता में मीडिया से बात करते हुए काज़मी के बेटे ने कहा, ''मेरे पिता बेगुनाह हैं और मैं सरकार से अपील करता हूं कि उनके साथ बदसलूकी न की जाए. उनके खिलाफ़ निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं और हम इसका विरोध करते हैं.''

पत्रकार वार्ता में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सईद नकवी ने कहा कि काजमी को वो वर्षों से जानते हैं और संवेदनशील मसलों पर लिखने वालों को उनके काम के लिए प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए.

इस बीच सीपीआई के सचिव अतुल कुमार अनजान ने भी काज़मी की गिरफ़्तारी की निंदा करते हुए कहा है कि काज़मी सरकारी संस्था पीआईबी की ओर से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं और पिछले 25 साल से काम कर रहे हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी एजेंसी ने उन्हें मान्यता देने से पहले क्या कोई जांच नहीं की थी.

अतुल का मानना है कि काज़मी मध्यपूर्व मामलों के जानकार हैं और ऐसे में उनके पास से उस क्षेत्र से संबंधित जानकारियां या कुछ दस्तावेज मिलना ग़लत नहीं.

काज़मी अपने लेखों में ईरान का समर्थन करते रहे हैं और कई बार ईरान की यात्रा भी कर चुके हैं. वे एक समय में दिल्ली स्थित इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं.

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