बच्चों की तरह हरकत करते हैं कांग्रेस और विपक्ष: राहुल बजाज

Image caption राहुल बजाज को इस वित्तीय वर्ष में साढ़े छह से सात प्रतिशत तक आर्थिक प्रगति की उम्मीद है

मैं और लोगों की तरह सरकार के कामों को नंबर वगैरह में आंकने में यकीन नहीं रखता, कि आप मापें की ये एक से 10 के बीच कहां फिट बैठता है, क्योंकि सरकार का प्रबंधन एक जटिल प्रश्न है.

हां इतना जरूर कह सकता हूं कि जब ये सरकार सत्ता में आई थी तो इसकी छवि अर्थव्यवस्था में प्रगतिशीलता लाने वाली थी, लेकिन पिछले ढाई साल में इसकी सबसे बड़ी कमी रही है – राजनीतिक प्रबंधन.

मेरा ख्याल है मनमोहन सिंह सरकार बीमा और बैंकिग क्षेत्र में सुधार, खुदरा व्यापार में मल्टी ब्रांड और भूमि अधिग्रहण कानून लाना चाहते हैं लेकिन विपक्ष है कि होने नहीं देता.

बहुत बार तो कांग्रेस और मुख्य विपक्ष ने कुछ इस तरह का व्यवहार किया है जैसा कि मैंने एक बार कहा था को दोनों बच्चों की तरह आचरण कर रहे हैं. बीमा कानून मामले में तो बीजेपी अपने पुराने रुख से ही पलट गई.

विपक्ष का कहना है कि सरकार उनसे सलाह मशविरा नहीं करती. ये बात अरूण जेटली से लेकर रविशंकर प्रसाद तक एक बार नहीं बार-बार कह चुके हैं. सरकार को इस ओर ध्यान देने की जरूरत है.

साझा दल

लेकिन आर्थिक सुधारों की गाड़ी जो पिछले काफी दिनों से रुकी है, उसके लिए सरकार में शामिल कुछ राजनीतिक दल और खुद कांग्रेस पार्टी के कुछ लोग बहुत हद तक जिम्मेदार हैं.

हमें मालूम है ममता दीदी क्या कर रही हैं, या क्या करती रही हैं.

कांग्रेस पार्टी के कुछ लोग अभी भी वोट की राजनीति से आगे की नहीं सोच पा रहे.

रोजगार गारंटी अच्छी बात है, गरीबों का भला तो करना ही होगा वरना देश तरक्की नहीं कर पाएगा, लेकिन साथ ही ये भी देखने की जरूरत है कि डीजल से लेकर खाद तक जो करोड़ों रूपए की सब्सिडी सरकार हर साल दे रही है वो जा कहां रही है?

क्या वो उन लोगों तक पहुंच रही है जिनके नाम पर ये पूरी प्रक्रिया चलाई जा रही है? या वो कहीं और जा रही है?

अब खाद्य सुरक्षा कानून की बात ही लें. जबकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली इतनी बुरी स्थिति में है तो इसे किस तरह लागू किया जाएगा?

कार्यक्रम को लागू करने से पहले वितरण प्रणाली की जो कमियां है, उन्हें दूर किए जाने की जरूरत है.

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार से सख्ती से निपटने की जरूरत है. वर्तमान सरकार, शासन के संचालन की दिक्कत से भी जूझ रही है.

अब जैसे खुदरा व्यापार में मल्टी ब्रांड मामले को संसद में ले जाने की कोई जरूरत ही नहीं थी, ये एक प्रशासनिक फैसला था.

इस वित्तीय वर्ष में साढ़े छह से सात प्रतिशत तक आर्थिक प्रगति की उम्मीद की जा सकती है.

सरकार को ये कहना भी बंद करना चाहिए कि अमरीका और यूरोप में उपजी आर्थिक स्थिति हमारी दिक्कतों की वजह हैं.

हमारी अर्थव्यवस्था अभी भी बड़े पैमाने पर आंतरिक मांग पर निर्भर है.

हुकूमत को भूमि अधिग्रहण और पर्यावरण के लिए परियोजनाओं को दी जाने वाली मंजूरी की तरफ ध्यान देने की जरूरत है.

काफी परियोजनाएं इन दो कारणों की वजह से अटकी पड़ी हैं.

लेकिन पश्चिमी देशों में जारी हालात दो-तीन साल और चलेंगे, उसके लिए सचेत रहने की जरूरत है क्योंकि हम अब वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह अलग नहीं हैं.

छेड़छाड़

रही बात बजट के समय उद्योग जगत की तरफ से कुछ मांगों की तो मैं वित्तमंत्री से सिर्फ इतना आग्रह करूंगा कि वो करों में, चाहे वो प्रत्यक्ष कर हों या अप्रत्यक्ष, किसी तरह की छेड़छाड़ न करें क्योंकि पूरे क्षेत्र में जो मनोभाव है वो बड़ा ही नकारात्मक है.

वित्तमंत्री बचत को बढ़ावा देने के उपाय करें. इससे निवेश बढ़ेगा, साथ ही मांग में भी बढ़ोतरी होगी जो अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा.

ऐसे कदम, जैसे खाद्य क्षेत्र में जो सुनने में आ रहा है, न उठाए जाएं जिससे सरकार का घाटा और बढ़े क्योंकि वो मंहगाई को बढ़ावा देगा.

(बीबीसी संवाददाता फैसल मोहम्मद अली से बातचीत पर आधारित)

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