विश्व का सबसे लंबा फ्लाईओवर, कोलकाता में

फ्लाईओवर
Image caption सबसे लंबा रेलवे फ्लाईओवर चीन में बीजिंग और शंघाई के बीच है जिसकी लंबाई लगभग 164 किलोमीटर है.

फ्लाईओवर और एक सौ किलोमीटर लंबा और वह भी कोलकाता में? जी हां, पश्चिम बंगाल के शहरी विकास मंत्री फरहाद हाकिम की योजना तो कुछ ऐसी ही है.

पश्चिम बंगाल सरकार राजधानी कोलकाता में गड़िया से बांग्लादेश सीमा पर स्थित बनगांव तक पूरे एक सौ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की योजना बना रही है.

यह देश ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे लंबा ऐसा फ्लाईओवर होगा जिस पर कार और ट्रक समेत दूसरे वाहन चलेंगे. वैसे, फिलहाल सबसे लंबा पुल चीन में बीजिंग और शंघाई के बीच मौजूद रेलवे मार्ग पर है जिसकी लंबाई लगभग 164 किलोमीटर है.

सबसे लंबा फ्लाईओवर

यह महज लफ्फाजी नहीं है. राज्य सरकार ने इसके लिए प्राथमिक सर्वेक्षण का जिम्मा निजी क्षेत्र की एक कंपनी लारसन एंड टूब्रो (एल एंड टी) को सौंपा है जिसने यह काम शुरू भी कर दिया है. हाकिम ने कोलकाता में मर्चेट चैंबर आफ कामर्स के एक कार्यक्रम में सरकार की इस योजना का खुलासा किया.

हाकिम कहते हैं, "इस सौ किलोमीटर लंबे फ्लाईओवर के निर्माण का काम कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) करेगा. अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक हुआ तो यह परियोजना तीन साल में पूरी हो जाएगी.’ फिलहाल थाईलैंड का 54 किलोमीटर लंबा बैंगना एक्सप्रेसवे दुनिया का सबसे लंबा फ्लाईओवर है. शहरी विकास मंत्री कहते हैं कि इस परियोजना के विभिन्न पहलुओं का पता लगाने के लिए एक सर्वेक्षण चल रहा है. यह प्राथमिक सर्वेक्षण पूरा होने के बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी.''

हाकिम बताते हैं कि सरकार ने इस काम के लिए लारसन एंड टूब्रो को नियुक्त किया है.

अगले तीन-चार महीनों में इस परियोजना की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है.

अगर यह परियोजना सचमुच हकीकत में बदलती है तो इस रूट में ट्रैफिक जाम की समस्या लगभग खत्म हो जाएगी. रोजाना सैकड़ों ट्रक बनगांव होकर सीमा पार आते-जाते हैं. दक्षिण बंगाल में बनगांव बांग्लादेश से आयात-निर्यात का अकेला केंद्र है.

कौन उठाएगा खर्च

वैसे, कोलकाता में बीते कुछ वर्षों के दौरान कई नए फ्लाईओवरों का निर्माण हुआ है. लेकिन ममता बनर्जी सरकार के सत्ता में आने के बाद प्रस्तावित यह पहला फ्लाईओवर एक नया रिकार्ड कायम करेगा.

हाकिम बताते हैं कि यह देश के बेहतरीन फ्लाईओवरों में से एक होगा. इसके पूरा होने पर कोलकाता भी देश के बेहतरीन फ्लाईओवरों वाले महानगरों की सूची में शामिल हो जाएगा.

सर्वेक्षण की रिपोर्ट मिलने के बाद इस फ्लाईओवर के निर्माण के लिए संबंधित कंपनियों से निविदा आमंत्रित की जाएगी.

हाकिम कहते हैं, ‘सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगी. उनका कहना है कि यह परियोजना टोल टैक्स पर आधारित होगी, सार्वजनिक और निजी भागादीरी (पीपीपी) पर नहीं.

परियोजना पूरी होने के बाद इसकी लागत टोल टैक्स के जरिए वसूल की जा सकती है. फिलहाल यह तय नहीं है कि इस परियोजना का पूरा खर्च राज्य सरकार उठाएगी या केंद्र सरकार से भी इसके लिए आर्थिक सहायता की गुहार लगाई जाएगी. लेकिन मंत्री यह बताने को तैयार नहीं हैं कि इसके निर्माण पर कितनी लागत आएगी.

वे कहते हैं, ''इस पर एक हजार करोड़ से एक लाख करोड़ तक खर्च हो सकते हैं. लेकिन यह रकम प्राथमिक सर्वेक्षण के नतीजों के बाद तय होगी.''

शहरी विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार उस इलाके में इस लंबे फ्लाईओवर के निर्माण की बात कुछ अरसे से चल रही है, लेकिन अब तक इसका पूरा ब्योरा तैयार नहीं किया जा सका है.

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