पर्यटकों की रिहाई के लिए सरकार बातचीत को तैयार: नवीन पटनायक

माओवादियों की एक फाइल फोटो
Image caption उड़ीसा के कई जिलों में पुलिस नक्सलियों के खिलाफ सघन अभियान चला रही है.

उड़ीसा पुलिस का कहना है कि संदिग्ध माओवादियों ने इटली से आए दो पर्यटकों को अगवा कर उन्हें बंधक बना लिया है. मुख्यमंत्री ने उनकी रिहाई की अपील करते हुए कहा है कि सरकार इसके लिए बातचीत करने के तैयार है.

इटली के निवासी बताए जाने वाले इन दोनों पर्यटकों, बोसस्को पाओलो और क्लौडियो कोलेनजिलो, को कंधमाल और गंजाम जिले की सीमा पर अगवा किया गया है और इनकी रिहाई के लिए विद्रोहियों ने सरकार के सामने शर्ते रखी हैं.

अपहरणकर्ताओं को इन दोनों को तुरंत रिहा करने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि सरकार उनसे बातचीत करने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा, ''सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है, दोनों कानून के तहत और इंसानियत के नाते.''

उन्होंने कहा, मैं अपहरणकर्ताओं से उन्हें इंसानियत के नाते रिहा करने की अपील करता हूँ.''

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा कि दोनों पर्यटकों के अगवा होने के बारे में राज्य सरकार ने केंद्रीय गृहमंत्रालय और विदेश मंत्रालय को सूचना दे दी है.

गंजाम के पुलिस अधीक्षक राजेश पंडित ने बीबीसी को बताया, ''हम अलर्ट पर हैं और इस संबंध में जानकारियां जुटा रहे हैं.''

पुलिस को मिली खबरों के मुताबिक पर्यटकों तब अगवा किया गया जब वो कंधमाल और गंजाम जिलों की सीमा पर कुछ आदिवासियों की तस्वीरें खींचने की कोशिश कर रहे थे.

पुलिस को इसकी सुचना रविवार भोर को मिली.

सुत्रों का कहना है कि माओवादियों ने पर्यटकों की सुरक्षा के बदले सरकार को 13 मांगों की एक सूची भिजवाई है जिसमें उनके खिलाफ जारी सभी अभियानों को रोकने की मांग की गई हैं.

अभियान

ऐसी खबर है कि इसके बाद इलाके में जारी नकस्ल विरोधी अभियान को फिलहाल रोक दिया गया है.

हालांकि उड़ीसा में सक्रिय नक्सलियों ने पहले सरकारी अधिकारियों के अपहरण किए हैं लेकिन पर्यटकों को अगवा किए जाने की यह पहली घटना है.

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में मलकानगिरि के जिलाधिकारी आर विनील कृष्ण का अपरहण कर लिया गया था और उन्हें कई दिन बाद रिहा किया गया.

बीबीसी से बातचीत में एक पूर्व अपहरण के मामले में मध्यस्था करने वाले दंडपानी मोहांती ने सरकार और माओवादी दोनों से अपील की है. उन्होंने कहा, ''मै माओवादियों से अपील करता हूँ कि वे कोई भी कदम जल्दबाजी में न उठाएं.'' सरकार से उन्होंने आदिवासी नेताओं को रिहा करने की अपील की है.

उसके कुछ ही दिनों बाद पुलिस के एक सहायक सब-इंसपेक्टर के अगवा किए जाने का मामला भी सामने आया था.

पुलिस का कहना है कि राज्य के लगभग आधे जिलों में माओवादियों के खिलाफ अभियान जारी हैं. इन ऑपरेशनों में पिछले तीन-चार महीनों में तेजी आई है.

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