माओवादियों ने दिए मध्यस्थों के नाम

बोसुस्को पाओलो इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अपहृत पर्यटकों में से एक बोसुस्को पाओलो इटली के नागरिक हैं.

उड़ीसा में बंधक बनाए गए इटली के दो नागरिकों की रिहाई के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत के प्रस्ताव के जवाब में माओवादियों ने तीन मध्यस्थों के नाम सामने रखे हैं.

साथ ही इस मामले में माओवादियों की ओर से सरकार के सामने रखी गई समय-सीमा को बढ़ाकर मंगलवार शाम तक कर दिया गया है.

माओवादियों ने तब तक के लिए युद्धविराम की घोषणा की है. साथ ही उड़ीसा की सीमाओं पर सक्रिय नक्सलियों से समयसीमा खत्म होने तक हिंसा न करने की अपील की है.

बीबीसी सहित कुछ मीडिया संस्थाओं को भेजे गए एक ऑडियो संदेश में माओवादियों के प्रमुख नेता और प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के राज्य सचिव सब्यसाची पांडा ने कहा कि माओवादियों के वरिष्ठ नेता नारायण सान्याल, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील विश्वप्रिय कानूनगो और दमन प्रतिरोध मंच के संयोजक दंडपानी मोहंती माओवादियों और राज्य सरकार के बीच मध्यस्थता करेंगे.

सान्याल के नाम पर सवाल

नारायण सान्याल इन दिनों झारखंड की गिरीडीह जेल में हैं और माओवादियों के मुताबिक वही बातचीत का नेतृत्व करेंगे.

इस सवाल के जवाब में कि अगर मध्यस्थों के मुखिया के तौर पर सान्याल के नाम पर राज्य सरकार ने सहमति नहीं जताई उन्होंने कहा, ''मुझे अफसोस है कि ऐसा होने पर बातचीत की प्रक्रिया खत्म हो जाएगी.''

माओवादियों के मुताबिक इस बातचीत में राज्य सरकार के अलावा केंद्र भी शामिल होगा क्योंकि इसके लिए सान्याल की जेल से रिहाई ज़रूरी है.

राज्य सरकार की ओर से अभी माओवादियों को कोई जवाब नहीं दिया गया है. माना जा रहा है कि मंगलवार सुबह तक सरकार इस मामले में कोई जवाब दे सकती है.

सूत्रों के मुताबिक सरकार सान्याल के नाम को लेकर असहज है और यही वजह है कि मध्यस्थता की इस पेशकश का जवाब देने में समय लग रहा है.

माओवादियों ने एक प्रेस रिलीज़ के ज़रिए अपनी 13 मांगें भी सामने रखी हैं.

इन मांगों में आदिवासियों को 'प्रदर्शन की वस्तु' की तरह इस्तेमाल किए जाने, राज्य में माओवादियों के खिलाफ़ जारी सैन्य अभियान को खत्म करने और गननाथ पात्रा, शुभाश्री दास जैसे उन लोगों की रिहाई शामिल है जिन्हें कथित तौर पर झूठे आरोपों के तहत गिरफ्तार किया गया है.

पर्यटकों के अपहरण की पहली घटना

इससे पहले बीबीसी संवाददाता सुवोजीत बागची से बातचीत में अपहरण के एक पूर्व मामले में मध्यस्थता करने वाले दंडपानी मोहांती ने सरकार और माओवादियों से अपील करते हुए कहा था, ''मै माओवादियों से अपील करता हूँ कि वे कोई भी कदम जल्दबाजी में न उठाएं.''

साथ ही सरकार से उन्होंने आदिवासी नेताओं को रिहा करने की अपील की थी.

इस बीच सरकार का कहना है कि वो इटली के पर्यटकों बोसुस्को पाओलो (54) और क्लौडिओ कोलैंजेलो (61) की रिहाई के लिए सभी ज़रूरी कदम उठा रही है.

उड़ीसा में सक्रिय नक्सलियों ने पहले सरकारी अधिकारियों के अपहरण किए हैं लेकिन पर्यटकों को अगवा किए जाने की यह पहली घटना है.

गौरतलब है कि पिछले साल फरवरी में मलकानगिरि के जिलाधिकारी आर विनील कृष्ण का अपरहण कर लिया गया था और उन्हें कई दिन बाद रिहा किया गया.

पुलिस का कहना है कि राज्य के लगभग आधे जिलों में माओवादियों के खिलाफ अभियान जारी हैं. इन ऑपरेशनों में पिछले तीन-चार महीनों में तेजी आई है.

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