केंद्र ने कहा, समलैंगिकता से आपत्ति नहीं

समलैंगिक इमेज कॉपीरइट Reuters

केंद्र सरकार ने कहा है कि उसे समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाने में आपत्ति नहीं है.

महाधिवक्ता जीई वाहनवती ने उच्चतम न्यायालय के सामने केंद्र सरकार का रुख़ स्पष्ट करते हुए कहा कि इस बारे में उसे दिल्ली उच्च न्यायालय का फ़ैसला स्वीकार्य है.

वाहनवती का कहना था कि उसे समलैंगिकता को स्वीकार्य बनाने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय के फ़ैसले से काफ़ी कुछ पता चला है.

महाधिवक्ता से न्यायमूर्ति जीएस सिंघवी और एसजे मुखोपाध्याय की खंडपीठ ने मंगलवार को पूछा था कि सरकार का इस मुद्दे पर क्या रुख़ है.

इस पर वाहनवती ने कहा कि उच्च न्यायालय के फ़ैसले में कोई वैधानिक गलती नहीं है और ये सरकार को स्वीकार्य है.

इस पर खंडपीठ ने पूछा कि उच्च न्यायालय में गृह मंत्रालय ने समलैंगिक संबंध का विरोध करते हुए जो शपथ पत्र दाखिल किया था क्या वो गलत था?

विरोध

वाहनवती ने इस पर जवाब दिया कि सरकार ने उच्च न्यायालय का फ़ैसला देखा और पाया कि इस तरह के संबंध को अपराध की श्रेणी में रखना समलैंगिकों के मूलभूत अधिकारों का हनन है.

महाधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया, "हमने जब फ़ैसला पढ़ा तो हमें उससे काफ़ी कुछ पता चला और सरकार ने सही चीज़ स्वीकार की." इसके बाद उनका कहना था कि उच्च न्यायालय के फ़ैसले का इसीलिए विरोध नहीं किया गया.

उन्होंने ये भी माना कि पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय में जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पीपी मेहरोत्रा ने समलैंगिक संबंधों का विरोध किया था तब वो दरअसल गृह मंत्रालय के क़ानून मामलों से जुड़े अधिकारियों के बीच संवाद की कमी का नतीजा था.

इस मामले में शुरुआत में सरकार ने कहा था कि समलैंगिकता 'अनैतिक' है और 'सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध' भी है.

इसके बाद व्यापक आलोचना को देखते हुए सरकार को बयान देना पड़ा कि इस मामले में उसने अंतिम राय अभी नहीं बनाई है.

संबंधित समाचार