कुडनकुलम में काम शुरु, कार्यकर्ता अनशन पर

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र
Image caption तमिलनाडु कैबिनेट के प्रस्ताव के बाद कुडनकुलम में काम दोबारा शुरू हो गया है.

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर राजनीति एक बार फिर गरमा रही है. तमिलनाडु कैबिनेट द्वारा संयंत्र को हरी झंडी दिए जाने के बाद सरकार ने इस वर्ष अगस्त तक इसे चालू करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं.

लेकिन सरकारी कदम को स्थानीय लोगों और गैर-सरकारी संस्थाओं के पुरजोर विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

कुडनकुलम के विरोध के ग्राउंड ज़ीरो इडतकराई में गैर-सरकारी संस्था ‘पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट न्यूक्लियर एनर्जी’ के एसपी उदयकुमार सोमवार दोपहर से अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे है. उनके साथ 15 अन्य कार्यकर्ता भी अनशन पर हैं.

इडतकराई परमाणु ऊर्जा संयंत्र से करीब सात किलोमीटर है. इस गांव से आगे किसी भी व्यक्ति को नहीं जाने दिया जा रहा है. बीबीसी संवाददाता टीएन गोपालन के अनुसार अनशन पर बैठे लोग स्थानीय चर्च के अहाते में हैं और उन्हें पुलिस ने घेर रखा है.

गत सितंबर में प्रदर्शनकारियों ने संयंत्र पर काम करने जाने वाले कर्मचारियों और वैज्ञानिकों को रोकने की कोशिश की थी. लेकिन इस बार पुलिस किसी को इडतकराई से आगे नहीं जाने दे रही.

कई महीनों से इडितकराई ग्रामीणों और मछुआरों के विरोध प्रदर्शन का केंद्र रहा है. तमिलनाडु कैबिनेट के फैसले के बाद अब प्रदर्शनकारियों के निशाने पर राज्य सरकार है.

उधर सरकार के निर्णय के बाद इंजीनियर और वैज्ञानिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र में दाखिल हो गए हैं.

अनशन

एसपी उदयकुमार और पुष्पारायन समेत आठ पुरूष और सात महिलाएं इडितकराई में अनशन पर बैठे हैं.

‘पीपल्स मूवमेंट अगेंस्ट न्यूक्लियर एनर्जी’ की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में तमिलनाडु कैबिनेट के प्रस्ताव को वापस लेने की मांगी की गई है.

इसके अलावा उन्होंने अपने गिरफ़्तार साथियों को रिहाई और कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों के एक दल द्वारा जांच करवाने की मांग भी रखी है.

इसके अलावा भारत और रूस के बीच फरबरी 2008 को हुए कुडनकुलम को लेकर समझौते को सार्वजनिक करने की भी मांग रखी गई है.

साथ ही कार्यकर्ताओं की मांग है कि कुडनकुलम परमाणु संयंत्र के 30 किलोमीटर के दायरे में एक सुरक्षा और बचाव कार्यों की ड्रिल करवाई जाए.

उधर तमिलनाडु कैबिनेट द्वारा कुडनकुलम को हरी झंडी दिए जाने का पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने स्वागत किया है.

दक्षिण भारत के एक उद्योग संगठन, साउथ इंडियन चैंबर ऑफ़ कॉमर्स ऐंड इंडस्ट्री ने एक बयान में कहा है कि इससे राज्य को बिजली की कमी से थोड़ी-बहुत राहत मिलेगी.

क्या है मामला

रूस की सहायता से करीब 13 हज़ार करोड़ की लागत से बनाया जा रहा कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र में काम पूरा होने के बाद छह रिएक्टर होंगे. ये भारत का सबसे बड़ा ऊर्जा संयंत्र होने वाला है.

लेकिन इसके विरोधियों का कहना है कि इस संयंत्र की वजह से मछुआरों और ग्रामीणों को रोजी-रोटी पर चोट पहुंचेगी. सरकार भय को गलत बताती रही है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो हाल ही में यहां तक कह दिया था कि संयंत्र के विरोध के पीछे अमरीकी गैर-सरकारी संस्थाओं का हाथ है.

एसपी उदयकुमार जैसे कई कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया था.

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