कोयला घोटाले पर खबर भ्रामक: सीएजी

 गुरुवार, 22 मार्च, 2012 को 17:12 IST तक के समाचार

कैग मे कहा है कि जिस तरह से यह कागज़ात लीक हुए हैं यह उसके लिए बेहद पीड़ादायक है

दिल्ली के एक अखबार में नियंत्रक महालेखाकार (सीएजी) के हवाले से छपी कोयले में महाघोटाले खबर से दिन भर संसद में सरकार की जान आफत में रही लेकिन शाम तक सीएजी ने खबर का खंडन कर दिया.

सुबह जब संसद शुरू हुई तो विपक्ष ने कोयले की खदानों में कथित घोटालों की बात पर हंगामा खड़ा कर दिया. राज्य सभा को इस हंगामे की वजह से दो बार स्थगित करना पड़ा.

दरअसल पूरे हंगामे की वजह टाइम्स ऑफ़ इंडिया अखबार में छपी एक खबर थी जिसमे कहा गया था कि सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोयले की खदानों की नीलामी न करने से सरकार को दस लाख करोड़ रुपयों से भी ज़्यादा का नुकसान हुआ है.

आरोप

" इस देश में लूट राज है. भारतीय जनता पार्टी ने कई नियमों के तहत इस पर बहस करने की मांग की है"

प्रकाश जावडेकर, भाजपा प्रवक्ता

भारतीय जनता पार्टी के नता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि " इस देश में लूट राज है. भारतीय जनता पार्टी ने कई नियमों के तहत इस पर बहस करने की मांग की है."

भाजपा इस खबर पर हंगामा करने वाली अकेली पार्टी नहीं थी

जनता दल यूनाईटेड के राष्ट्रिय अध्यक्ष शरद यादव ने कहा " यह टू जी घोटाले की तरह ही है. कोयला मंत्रालय को पिछले आठ साल में अधिकांशत तीन लोगों ने चलाया है जिनमे प्रधानमंत्री और वर्तमान मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल भी शामिल हैं."

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा "सीएजी ने जो अनुमान पेश किया है उसपर एक जांच की ज़रुरत है ताकि यह तो पता लगे कि यह सही है या गलत."

सरकार की सफाई

"यह एक रिपोर्ट का मसौदा है यह रिपोर्ट नहीं है. सामान्य प्रक्रिया के मुताबिक मसौदा रिपोर्ट आती है, उस पर मंत्रालय की सफाई दी जाती है उसके बाद रिपोर्ट बनती है फिर उसे संसद के पटल पर रखा जाता है"

प्रणब मुखर्जी, वित्तमंत्री

इस सबके बीच केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने कहा कि वो अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर कोई टिपण्णी नहीं करेगें.

दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए जयसवाल ने अपनी तरफ से सफाई भी दी.

कोयला मंत्री ने कहा " जब सीएजी की कोई रिपोर्ट हमारे पास आएगी तब हम टिपण्णी करेगें. और जहाँ तक यूपीए टू की बात है जब से मैं कोयला मंत्री बना हूँ तब से कोई कोयला खदान नहीं आवंटित की गई हैं अगर इसके पहले की कोई बात है तो इसका अध्यन करने के बाद टिप्पणी करेगें."

कोयला मंत्री ही की तरह सरकार के अन्य मंत्रियों ने भी रिपोर्ट के औपचारिक रूप से आने तक टिप्पणी न करने की बात कही.

लोक सभा में हंगामे के बाद बोलते हुए केन्द्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुख़र्जी ने कहा "यह एक रिपोर्ट का मसौदा है यह रिपोर्ट नहीं है. सामान्य प्रक्रिया के मुताबिक मसौदा रिपोर्ट आती है, उस पर मंत्रालय की सफाई दी जाती है उसके बाद रिपोर्ट बनती है फिर उसे संसद के पटल पर रखा जाता है."

क्या थी खबर

अखबार की खबर के मुताबिक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2004- 2009 के बीच सरकारी और निजी कंपनियों को कोयले के 155 ब्लॉक बिना नीलामी किए बांट दिए गए.

अख़बार ने रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि इन कंपनियों में करीब 100 निजी कंपनियां हैं जिन्हें औने-पौने दामों पर कोयले के ब्लॉक बांटे गए. इन ब्लॉकों में अब तक एक-चौथाई काम भी शुरू नहीं हुआ है.

"यह पूरी चर्चा अभी एकदम आरंभिक अवस्था में है और यह हमारी पहली मसौदा रिपोर्ट का हिस्सा भी नहीं है. अखबार की खबर गुमराह करने वाली है"

सीएजी

ये भी कहा जा रहा है कि साल 2004- 2009 के बीच तकरीबन 33 हजार मिलियन टन से ज्यादा कोयले की गैरकानूनी माइनिंग हुई.

अखबार की खबर के अनुसार सीएजी का कहना है कि सबसे घटिया श्रेणी के कोयले की कीमत को आधार बनाकर नुकसान का आंकलन किया गया है. अगर मध्यम श्रेणी के कोयले की कीमत को आधार बनाया जाता तो नुकसान कहीं ज्यादा आता.

सीएजी की 110 पन्नों की रिपोर्ट संसद के इसी बजट सत्र में पेश की जानी है.

महालेखाकार की सफाई

इस हंगामे के बीच शाम को सीएजी की तरफ से प्रधानमंत्री को एक खत लिखा गया जिसमे कहा गया कि कोयला कंपनियों को पहुंचा फायदा ज़रूरी नहीं कि देश को होने वाले नुकसान के बराबर हो.

सीएजी ने मनमोहन सिंह को लिखे अपने ख़त में कहा "यह पूरी चर्चा अभी एकदम आरंभिक अवस्था में है और यह हमारी पहली मसौदा रिपोर्ट का हिस्सा भी नहीं है. अखबार की खबर भ्रामक है."

इस ख़त में यह भी कहा गया कि कोयला मंत्रालय के उत्तरों से सीएजी के विचार बदल गए हैं और इस जिस तरह से यह कागज़ात लीक हुए हैं यह उसके लिए बेहद पीड़ादायक हैं.

हो सकता है कि सीएजी की रिपोर्ट से सरकार ने अभी राहत की सांस ली हो लेकिन यह राहत कितने दिन चलेगी कहा नहीं जा सकता.

इसी ख़त के आधार पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ट्विटर पर अपनी ओर से सफ़ाई दी.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.