पाकिस्तान को हुर्रियत नेता गिलानी की चेतावनी

 शुक्रवार, 23 मार्च, 2012 को 00:14 IST तक के समाचार
सैयद अली शाह गिलानी (फाइल फोटो)

गिलानी 23 मार्च को दिल्ली में पाकिस्तानी दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात करेंगें.

भारत प्रशासित कश्मीर में अलगाववादी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने कहा है कि अगर पाकिस्तान ने कश्मीर के मुद्दे पर अपनी पुरानी नीति में बदलाव कर भारत के साथ कोई समझौता किया तो पाकिस्तान की जनता सड़कों पर उतर आएगी.

हालांकि सैयद अली शाह गिलानी ने साथ ये कहा कि अभी तक पाकिस्तान ने उनके सामने समझौते को लेकर कोई सुझाव पेश नहीं किया है.

तिरासी साल के गिलानी पिछले कई वर्षों से श्रीनगर स्थित अपने घर में नजरबंद हैं और उन्हें किसी भी सार्वजनिक सभा में भाषण देने की अनुमति नहीं है.

बीबीसी के साथ एक विशेष बातचीत में गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने कश्मीर के मामले में जो नीति अपनाई थी, पाकिस्तान की मौजूदा सरकार उसी पर कायम है.

गिलानी ने बीबीसी से बातचीत के दौरान 10 साल पहले सऊदी अरब में जनरल परवेज मुशर्रफ से हुई मुलाकात की जानकारी दी.

जनरल मुशर्रफ़ उस समय पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख थे.

दबाव

गिलानी ने बताया कि जनरल मुशर्रफ उन्हें कश्मीर के मसले पर पाकिस्तानी फार्मूले को मानने के लिए दबाव डाल रहे थे.

गिलानी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा, ''उनके साथ कई फौजी जनरल थे. वे सब मुझे जनरल मुशर्रफ के चार सूत्री फार्मूले को स्वीकार कराने की कोशिश कर रहे थे. मैंने इनकार कर दिया और कहा कि ये एक धोखा है.''

जनता खामोश नहीं रहेगी

"पाकिस्तान के जो लोग कश्मीर के मुद्दे पर कुछ ले-दे कर समझौता करने की बात करते हैं वे दरअसल पाकिस्तान के गठन की विचारधारा के विरोधी हैं और ऐसा करने से वे अपने ही देश की जनता के साथ धोखेबाजी करते हैं. इस पर वहां की जनता खामोश नहीं रहेगी."

सैयद अली शाह गिलानी, हुर्रियत नेता

गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान के जो लोग कश्मीर के मुद्दे पर कुछ ले-दे कर समझौता करने की बात करते हैं वे दरअसल पाकिस्तान के गठन की विचारधारा के विरोधी हैं और ऐसा करने से वे अपने ही देश की जनता के साथ धोखेबाजी करते हैं. इस पर वहां की जनता खामोश नहीं रहेगी.

गिलानी ने आगे कहा कि पाकिस्तानी सरकार जब भारत को व्यापार करने के लिए सबसे वरीयता वाला देश का दर्जा देती है या फिर भारत समर्थक कश्मीरी नेताओं के साथ हाथ मिलाती है तो वो कश्मीरियों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम करती है.

गिलानी ने कहा कि पाकिस्तान को भारत के साथ कोई भी राजनीतिक या आर्थिक संबंध कायम करने से पहले उसे कश्मीर से जोड़ कर देखना चाहिए.

अफसोस

उन्होंने ये भी कहा कि कश्मीर के मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान अगर कोई खुफिया समझौता कर भी लें तो कश्मीर और पाकिस्तान की जनता उसे नहीं मानेगी.

गिलानी ने भारत प्रशासित कश्मीर में होने वाले चुनावों में जनता के शामिल होने पर भी अफसोस जताया.

उनका कहना था, ''हमनें 2008 और 2010 में देखा कि किस तरह सैंकड़ों लोग प्रदर्शन के दौरान मारे गए और दूसरी तरफ लोगों ने कतारों में लगकर वोट डाले.''

पाकिस्तान के विपक्षी नेता इमरान खान के ताजा बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गिलानी ने कहा, ''पाकिस्तान में सत्ता चाहे जिसके पास भी हो, कश्मीर पर कोई सौदेबाजी संभव नहीं क्योंकि ये सिर्फ एक करोड़ 40 लाख कश्मीरियों का ही नहीं बल्कि 16 करोड़ पाकिस्तानियों का भी मसला है.''

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