'मिस्टर यूनिवर्स' की अधूरी कामना

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Image caption आइच आर्नोल्ड श्वाजनेगर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं.

वो जीवन के 100 वसंत देख चुके हैं, लेकिन पूर्व मिस्टर यूनिवर्स मनोहर आइच की एक मनोकामना आज भी अधूरी है - हॉलीवुड अभिनेता से नेता बने पूर्व मिस्टर यूनिवर्स आर्नोल्ड श्वाजनेगर से मुलाकात.

हॉलीवुड अभिनेता आर्नोल्ड श्वाजनेगर कैलिफ़ोर्निया के गवर्नर भी रह चुके है.

दो दशक पहले श्वाजनेगर की एक फिल्म देखने के बाद आइच उनके भारी प्रशंसक बन गए थे.

आइच कहते हैं, "मैंने कसरत छोड़ दी है, और अपनी उम्र के कारण मैं उनसे मिलने नहीं जा सकता.''

सतरह मार्च को आइच के सौवें जन्मदिन पर कोलकाता स्थित उनके घर के बाहर प्रशंकों की लंबी कतार लग गई थी. लोग केक, गुलदस्ते लेकर आए और उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं.

लेकिन श्वाजनेगर से भेंट की उनकी कामना ज्यों की त्यों कायम है.

प्रशिक्षण

आइच चार साल पहले तक जिम जाते थे जहां वो या तो कसरत में मशगुल रहते या फिर बच्चों को प्रशिक्षण देने में समय बिताते थे.

उनकी बेटी बानी बैनर्जी कहती हैं, लेकिन साल 2010 में उन्हें दिल का दौरा पड़ा. तब जीवन में दूसरी बार उन्हें अस्पताल में भरती होना पड़ा.

आइच कहते हैं, ''मैं इसलिए स्वस्थ्य रह पाया क्योंकि मैंने अपने शरीर का बहुत ध्यान रखा, नियमित रुप से व्यायाम किया और अनुशासित जीवन जीया.''

उनके परिवार का कहना है कि उन्होंने खान-पान का बहुत ध्यान रखा. वो बहुत नपा तुला भोजन करते थे और किसी तरह के नशे के आदी नहीं थे.

उनकी बेटी का कहना है कि उनके पिता के लिए शरीर का ध्यान रखने के अलावा कोई और नशा नहीं था.

मिस्टर यूनिवर्स के खिताब हासिल करने का आइच का सफर आसान नहीं था.

सफर

वर्ष 1949 में पूर्वी पाकिस्तान से शर्णाथी के तौर भारत आए आइच ने सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर फेरी लगाकर नारियल बेचे, बाद में उन्होंने ब्रिटिश रेलवे में क्लर्क के तौर पर नौकरी की. उन्होंने 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन हार गए.

लेकिन उन्हें जो शोहरत और यश हासिल हुआ वो उनके शारीरिक गठन की देन थी.

चार फिट साढ़े दस इंच लंबे आइच ने लंदन में आयोजित मिस्टर यूनिवर्स प्रतियोगिता में भाग लिया. उनके शरीर के अंगों की बेहद सुडौल बनावट ने उन्हें 'शॉर्ट कैटिगरी' में मिस्टर युनिवर्स का खिताब दिलवाया.

इससे एक साल पहले भी उन्होंने लंदन में इसी प्रतियोगिया में दूसरा स्थान हासिल किया था जिसके बाद वो ब्रिटेन में ही रूक गए थे. इसी वजह से उन्हें ब्रिटिश रेलवे में नौकरी भी मिली थी.

उन्हें 'पॉकेट हरक्युलस' के नाम से भी बुलाते थे.

हालांकि अब आइच के सारे दांत उम्र की भेंट चढ़ चुके हैं लेकिन फिर भी झुर्रियों से भरा शरीर उनकी सुडौल बनावट को पूरी तरह से छिपाने में सक्ष्म नहीं.

वे कहते है भगवान ने मुझे ऐसा शरीर दिया मुझे इससे अधिक क्या चाहिए?

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