बलवंत सिंह की फांसी पर गहराई अनिश्चितता

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Image caption एसजीपीसी ने फांसी के आदेश के खिलाफ राष्ट्रपति से अपील करने का फैसला किया है.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे बलवंत सिंह राजोआना की फांसी को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है.

अदालत के हुक्म के मुताबिक बलवंत सिंह राजोआना को 31 मार्च यानि शनिवार को फांसी दी जानी है.

लेकिन इस बीच खबर है कि पाटियाला जेल के अधीक्षक लखविंदर सिंह जाखड़ ने चंडीगढ़ अतिरिक्त सेशन जज को पत्र लिखकर कहा है कि वो फांसी के आदेश पर अमल करने में असक्षम हैं क्योंकि 'ये मामला पंजाब राज्य के सीमाक्षेत्र में नहीं है.'

इधर समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा है कि सिख धर्म की शिखर संस्था शिरोमणि गुरूद्वारा प्रबंधक कमिटि, यानी एसजीपीसी ने फैसला किया है कि वो बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सज़ा पर राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से दया की अपील करेगी.

पीटीआई के अनुसार एसजीपीसी को पंजाब की वर्तमान अकाली दल सरकार का समर्थन प्राप्त है.

सीमाक्षेत्र

जज शालिनी नागपाल को भेजे गए पत्र में पाटियाला जेल अधीक्षक लखविंदर सिंह जाखड़ ने कहा है, "इस फैसले के कार्यान्वयन में कानूनी दिक्कते हैं ... मामला पंजाब राज्य के अधिकार-क्षेत्र (सीमाक्षेत्र) से बाहर है. इन मुद्दों पर अतिरिक्त सेशन जज के गहन जांच की जरूरत है."

पत्र में लखविंदर सिंह जाखड़ ने कहा है कि बेअंत सिंह की हत्या के मामले में राजोआना और जगतार सिंह हवारा को मौत की सजा सुनाई गई थी, हवारा के मृत्यू दंड को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया है; लेकिन राजोआना ने मृत्यू दंड के खिलाफ अपील करने से इंकार कर दिया है. इसी मामले में एक और अभियुक्त लख्जविंदर सिंह ऊर्फ लखा की अपील सुप्रीम कोर्ट के समक्ष है.

कहा गया है कि कानून के अनुसार राजोआना की फांसी की सजा पर तबतक अमल नहीं किया जाए जबतक लखा और हवारा की अपील पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता.

जेल अधीक्षक लखविंदर सिंह जाखड़ ने तर्क दिया है कि इस मामले में पाटियाला केंद्रीय जेल को भेजा गया आदेश सही नहीं है क्योंकि उक्त कैदी को पहले बुरैल जेल (चंडीगढ़) भेजा गया था इसलिए उनके मामले में आदेश वहीं भेजा जाना चाहिए था क्योंकि हाई कोर्ट से सज़ा पर स्वीकृति के बाद इसपर अमल के लिए आदेश उसी जेल को दिए जाते हैं जहां बंदी को सबसे पहले भेजा गया था.

जज शालिनी नागपाल ने पाटियाला जेल को भेजे आदेश में कहा था कि राजोआना को 31 मार्च को फांसी दे दी जाए.

सरकार

पीटीआई के अनुसार एसजीपीसी की एक आपात बैठक में, जिसमें संगठन के अध्यक्ष और पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिहं बादल भी शरीक हुए, कमिटि ने रविवार को दिए गए बयान में कहा कि वो भाई राजोआना की सज़ा की माफी के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं ताकि पंजाब में जो शांति स्थापित हुई है वो भंग न हो.

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि वो इस मामले पर विधानसभा में एक विशेष बयान देंगे.

इस बीच प्रकाश सिंह बादल सरकार में सहयोगी दल भारतीय जनता पार्टी के पंजाब प्रमुख अश्वनि शर्मा ने कहा है कि मामला न्यायालय के समक्ष है और किसी को भी इसमें दखल का अधिकार नहीं.

पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या साल 1995 में कर दी गई थी.

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