ओडिशा: बंधकों की रिहाई के लिए माओवादियों की मांगे

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Image caption शुक्रवार को माओवादियों ने कोरापुट में जीना हिकाका का अपहरण कर लिया था.

ओडिशा में लखमीपुर के विधायक जीना हिकाका के अपहरण के दो दिन बाद माओवादियों ने सोमवार को उनकी रिहाई के लिए राज्य सरकार के पास कुछ मांगें भेजी हैं.

जीना हिकाका के अलावा राज्य में माओवादियों ने एक इतालवी नागरिक बोसस्को पाओलो को अभी भी अपने कब्जे में रखा है.

जबकि एक और इतालवी नागरिक क्लॉडियो कोलेंजिलो को रविवार सुबह रिहा कर दिया गया था. इस बीच सी पी आई माओवादी आंध्र ओडिशा बॉर्डर कमिटी क़ी ओर से कॉमरेड दया और कामरेड जगबंधु के हस्ताक्षर में राज्य सरकार के पास भेजे गए एक पत्र में माओवादियों ने चार प्रमुख मांगें रखी है.

'ग्रीन हंट पर रोक'

उनकी पहली मांग है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट तत्काल बंद कर दिया जाए.

दूसरी मांग यह है कि पिछले वर्ष मलकानगिरी के तत्कालीन जिलाधिकारी आर विनील कृष्ण क़ी रिहाई के समय राज्य सरकार ने जो वायदे किये थे उन्हें तत्काल पूरा किया जाए.

माओवादियों ने अपनी तीसरी मांग यह राखी है कि सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त किया जाए और बेरहामपुर में गिरफ्तार किये गए चासी मुलिया संघ के कायकर्ताओं को रिहा किया जाए. माओवादियों ने अपने पत्र में इस बात पर भी जोर दिया है कि सरकार मीडिया के जरिये यह घोषणा करे कि राजनैतिक बंदियों को कब तक रिहा किया जायेगा. इसके बाद ही माओवादी बताएँगे कि हिकाका को कब रिहा किया जायेगा. इसके साथ ही एक चेतावनी भी दी गई है कि अगर सरकार बंधक बनाये गए विधायक को रिहा करने के लिए कोई ऑपरेशन शुरू करती है तो माओवादी 'चरम कदम' उठाने पर मजबूर हो जायेंगे.

‘जीना हिकाका स्वस्थ’

इस बीच अपहृत विधायक जीना हिकाका के हस्ताक्षर वाला एक पत्र सोमवार को मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के पास आया, जिसमे उनसे माओवादियों क़ी मांगों को स्वीकार कर लेने क़ी अपील क़ी गई है.

उन्होंने इस पात्र में अपने स्वस्थ होने कि बात का भी उल्लेख किया है. माओवादियों क़ी ओर से सरकार के साथ बातचीत कर रहे दमन प्रतिरोध मंच के दंडपानी मोहन्ती ने भी कहा है कि हिकाका की सेहत के बारे में उन्हें आश्वासन दिया गया है. दोनों पक्षों के बीच स्थगित बातचीत सोमवार दोपहर दोबारा शुरू हुई है. उधर ओडिशा विधान सभा में बीजू जनता दल और चासी मुलिया संघ के बीच कथित सांठगाँठ को लेकर भारी हंगामा हुआ.

विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों ने इस बात को लेकर काफी विरोध किया जिसके कारण सदन को बार बार स्थगित करना पड़ा.

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