सेनाध्यक्ष ने लिखित शिकायत नहीं दी: एंटनी

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Image caption एके एंटनी मामले की सीबीआई जांच की घोषणा सोमवार को ही कर चुके हैं.

भारत के सेनाध्यक्ष वीके सिंह को 14 करोड़ रुपए की रिश्वत की पेशकश के मामले में रक्षामंत्री एके एंटनी ने कहा कि जनरल वीके सिंह ने उन्हें घटना के बारे में तो बताया था लेकिन इसकी लिखित शिकायत देने से इंकार कर दिया था.

उधर सेवानिवृत्त लेफ़्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह, जिनका जिक्र इस प्रकरण में कुछ जगह मीडिया में आया था, ने इससे किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है.

मंगलवार को तेजिंदर सिंह ने बीबीसी को बताया कि वे सेनाध्यक्ष वीके सिंह के खिलाफ़ दिल्ली हाई कोर्ट में कानूनी कार्रवाई करने जा रहे हैं.

सेवानिवृत्त लेफ़्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह ने बीबीसी को बताया, "सेनाध्यक्ष से आखिरी बार मेरी मुलाकात करीब डेढ़ साल पहले सितंबर 2010 में हुई थी. उसके बाद तो मैं उनसे मिला नहीं. उनसे जब मिला था तो सामान्य बातचीत हुई थी. मैं उनके पास किसी निजी काम से गया था. मैं किसी कंपनी का प्रतिनिधित्व नहीं करता था, ना करता हूं. ऐसी कोई बात नहीं हुई, ना मेरे पास ऐसी कोई बात करने का अधिकार था."

उधर रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा, " एक साल पहले सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने मुझे बताया कि जनरल, शायद तेजिंदर सिंह उनसे मिले और मुझे रिश्वत की पेशकश की. मैं हैरान था. एक मिनट तक मैं चुप बैठा रहा....मैंने उनसे कहा कि कार्रवाई करो. जनरल ने कहा कि मैं ऐसा नहीं करना चाहता. पता नहीं क्यों? उन्हें मुझे या विभाग को लिखित शिकायत देनी चाहिए थी."

उन्होंने कहा कि सोमवार को द हिंदु अख़बार में ख़बर छपने के बाद सीबीआई जांच के आदेश दिए थे.

'भ्रष्टाचार सहन नहीं'

एके एंटनी ने कहा, "मुझे बिना किसी नाम-पते के भी शिकायत मिलती है तो मैं उसकी जांच करवाता हूं. मैं ऐसी शिकायतों को मंत्रालय को जांच के लिए देता रहा हूं. मैं किसी को नहीं छोड़ता, चाहे वो जितना भी बड़ा क्यों ना हो. मैंने कुछ गलत नहीं किया है. अगर मैंने कोई गलती की है तो मुझे सजा मिलनी चाहिए. "

रक्षामंत्री ने कहा कि उन्होंने सेना के साथ हर बैठक में कहा है कि वे भ्रष्टाचार को बिल्कुल सहन नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि सेना के आधुनिकीकरण के पक्षधर तो हैं लेकिन भ्रष्टाचार को सहन करने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

उन्होंने कहा कि भारत सरकार रक्षा संबंधी सामान की आपूर्ति करने वाली छह कंपनियों को ब्लैकलिस्ट कर चुकी है. इनमें एक इसराइली, एक रूसी, एक सिंगापोर, एक जर्मन कंपनी और दो भारतीय कंपनियां शामिल हैं.

विपक्ष ने जताई चिंता

एके एंटनी ने कहा, "मैंने सेना की तीनों अंगों के प्रमुखों और अधिकारियों को बता रखा है कि रक्षा सौदे चाहे जिस भी स्टेज पर हों अगर भ्रष्टाचार हुआ तो उन्हें रद्द कर दिया जाएगा. मुझ पर सैनिक सामान की खरीद में देरी के आरोप लगे लेकिन मैंने साफ किया कि में भ्रष्टाचार को सहन नहीं कर सकता."

उन्होंने कहा आदर्श समेत उन्होंने कई मामलों में सीबीआई और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं.

राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में जो तथ्य सार्वजनिक हुए हैं वो चिंतित करने वाले हैं.

उन्होंने कहा कि सेना के आधुनिकीकरण को प्रभावित किए बिना इस मामले को जल्द से जल्द सुलझा लिया जाना चाहिए. जेटली सवाल उठाया कि इस मामले में तुरंत कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी.

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