चंडीगढ़ कोर्ट ने कहा राजोआना को मिले फाँसी

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी पाए गए बलवंत सिंह राजोआना को फांसी देने का विवाद गहराता जा रहा है.

चंडीगढ़ सेशन्स कोर्ट ने मंगलवार शाम को राजोआना की मौत की सजा का वारंट वापस करते हुए कहा है कि उसे मौत की सजा दी जाए.

इससे पहले पटियाला जेल के अधीक्षक ने चंडीगढ़ अतिरिक्त सेशन जज को पत्र लिखकर कहा था कि वो फांसी के आदेश पर अमल नहीं कर सकते क्योंकि 'ये मामला पंजाब राज्य के सीमाक्षेत्र में नहीं है.

फैसले के बाद पंजाब सरकार के वकील अनूपइंदर सिंह गरेवाल ने बताया, "चंडीगढ़ कोर्ट ने पटियाला जेल अधीक्षक की अर्जी नामंजूर कर दी है और कहा है कि राजोआना को फाँसी की सजा दी जाए. हम उच्च न्यायालय को गुहार लगाएँगे. बलवंत सिंह की दया याचिका राष्ट्रपति के पास है. हमारा कहना है कि अगर राष्ट्रपति बलवंत सिंह की दया याचिका मंज़ूर हो जाती है तो क्या हम एक मृत व्यक्ति को ज़िंदा कर पाएँगे."

वहीं बलवंत सिंह ने आज एक पत्र लिखकर ने भी फिर से ये बात दोहराई है कि उन्हें मौत की सजा के मामले में माफी नहीं चाहिए. उनके तेवर काफी तेवर थे.

बलवंत सिंह की मुँह बोली बहन ने उनकी ओर से ये पत्र पढ़ा, “सब अखबारों में ये खबर छपी हैं कि अकाली दल और शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी मेरी फांसी के खिलाफ हिंदुस्तान के राष्ट्रपति के पास जाकर रहम की अपील करेंगे. मैं इनसे यही कहना चाहूँगा कि मेरे लिए रहम माँगकर खालसा पंथ के स्वाभिमान को दिल्ली के पैरों में डालने की कोशिश न करना. इस संघर्ष में चाहे जान जाए या जीवन मिले इस बात का कोई महत्व नहीं है. अकाली दल से मेरा कोई संबंध नहीं है.”

परिवार का रुख़

चंडीगढ़ की एक अदालत ने बलवंत सिंह को फाँसी दिए जाने के लिए 31 मार्च की तारीख तय की हुई है. चंडीगढ़ कोर्ट के निर्देश के बाद पंजाब सरकार के लिए मुश्किल हो गई है.

क्योंकि पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पहले ही साफ चुके हैं कि वे राष्ट्रपति से मिलकर बलवंत सिंह राजोआना की फांसी की सजा माफ किए जाने की मांग उठाएँगे.

उनका कहना था कि बेअंत सिंह हत्याकांड से जुड़े अन्य लोगों को जो राहत मिली है वो राहत बलवंत सिंह को भी मिलनी चाहिए. हम इसके लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाएँगे.

ये विवाद अब राजनीतिक रुख अख़्तियार कर चुका है. बलवंत सिंह के लिए माफ़ी माँगने वालों में सत्ताधारी अकाली दल न नहीं बल्कि खुद बेअंत सिंह के परिवारजन भी शामिल है.

जबकि पंजाब में सत्ताधारी पार्टी अकाली दल की सहयोगी पार्टी भाजपा का रुख़ कुछ अलग है. पार्टी नेता का कहना है, “किसी को भी इस कानूनी प्रक्रिया में दखल नहीं देना चाहिए. खासकर बात जब एक चुने हुए मुख्यमंत्री की हत्या से जुड़ी है. कानून को अपना काम करने देना चाहिए.”

उधर एमनेस्टी इंटरनेशनल ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खुले पत्र में अपील की है कि बलवंत सिंह को फाँसी की सजा न दी जाए और भारत में मौत की सजा पर आधिकारिक मनाही हो.

वर्ष 1995 में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की चंडीगढ़ में हत्या कर दी गई थी और इस हत्या में भूमिका के लिए चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत ने 2007 में बलवंत सिंह को मौत की सजा सुनाई थी.

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