बारूदी सुरंग विस्फोट में 13 जवान मरे

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Image caption विस्फोट में 13 जवानों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी.

छत्तीसगढ़ से लगे महाराष्ट्र के गढ़चिरोली में हुए एक बारूदी सुरंग के विस्फोट में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 13 जवानों के मारे जाने की खबर है जबकि पांच जवान घायल बताए जाते हैं.

गढ़चिरोली में पदस्थापित एक वरिष्ट पुलिस अधिकारी नें बीबीसी को बताया कि घटना दोपहर की है जब धनोरा के पास से गुजर रही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक बस माओवादियों छापामारों द्वारा लगाए गए बारूदी सुरंग की चपत में आ गयी.

विस्फोट इतना जोरदार था कि वाहन के परखचे उड़ गए और धमाके की आवाज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी. अधिकारियों का कहना है कि गढ़चिरोली में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के चार कैंप हैं. यह कैंप धनोरा, बामरागढ़, देसैगढ़ और धनोरा में स्थित हैं. जवानों का अक्सर एक कैंप से दूसरे कैंप तक आना जाना लगा रहता है.

कहां थी 'रोड ओपनिंग पार्टी'?

मगर नक्सल प्रभावित इन इलाकों से जाते हुए जवानों को विशेष सतर्कता बरतने की हिदायत भी दी गयी थी. कभी भी जवानों का इस इलाके में आवा गमन होता है तो उससे पहले वहां 'रोड ओपनिंग पार्टी' को लगाया जाता है जो बारूदी सुरंगों का पता लगाने का काम करती है. अभी यह पता नहीं चल पाया है कि गढ़चिरोली में जवानों के आवा गमन से पहले रोड ओपनिंग पार्टी को लगाया गया था या नहीं.

अधिकारी बताते हैं कि सीआरपीएफ का वाहन कवापा से फुबुरीगट्टा जा रहा था जब सड़क के बीचो बीच बिछाई गयी बारूदी सुरंग का विस्फोट हुआ. कहा जा रहा है की सीआरपीफ के महानिदेशक के विजय कुमार भी गढ़चिरोली के दौरे पर हैं और उनकी मौजूदगी के दौरान ही यह हादसा हुआ है. हालांकि कुमार घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे.

विदेशी नागरिकों का अपहरण

विस्फोट में 13 जवानों की घटना स्थल पर ही मौत हो गयी. पुलिस के अधिकारियों को आशंका है कि घटना में मारे गए जवानों की संख्या बढ़ भी सकती है क्योकि कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं.

इस बीच ओडिशा राज्य में माओवादियों के एक दूसरे दल की ओर से अगवा किए गए दो इतालवी नागरिकों में से एक को बीते रविवार रिहा किया गया है. यह पहला मामला है कि जब नक्लियों द्वारा विदेशी नागरिकों को अगवा किया गया है.

इससे पहले 21 जनवरी 2012 को झारखण्ड में हुए एक बारुदी सुरंग हमले में 12 जवानों की मौत हो गई थी. जबकि जून 2010 में छत्तीसगढ़ में हुए एक छारामार हमले में 26 पुलिसकर्मी मारे गए थे.

भारत में नक्सली हिंसा आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है, हालांकि पिछले कुछ सालों में इस तरह के हमलों में कमी आई है.

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