हिंदुओं के मुकाबले मुसलमान महिलाओं में कैंसर कम

 बुधवार, 28 मार्च, 2012 को 16:16 IST तक के समाचार

शोधकर्ताओं का कहना है कि पूरे भारत में साल 2010 में कैंसर की वजह से 5,56,400 लोग मारे गए

एक नए अध्ययन से पता चला है कि भारत में कामकाजी लोगों की मौत की एक मुख्य वजह कैंसर है.

लांसेट पत्रिका में छपे इस शोध में कहा गया है कि भारतीय पुरुष मुंह, पेट और फेफड़े के कैंसर तथा महिलाएं गर्भाशय, पेट और स्तन कैंसर की वजह से मौत का शिकार होती हैं.

सेंटर फॉर ग्लोबल हेल्थ रिसर्च, सेंट माइकल हॉस्पिटल और टोरंटो विश्वविद्यालय कनाडा और उनके विश्व भर के साथियों ने ये शोध किया है.

उनका कहना है कि भारत की तीन चौथाई आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है और कैंसर से मौत के मामलों में इससे पहले जो आकलन किए गए, वे शहरी आबादी पर आधारित थे.

अध्ययन में शामिल 1,22,429 मौतों में से 7137 मौतें कैंसर की वजह से हुईं. जबकि पूरे भारत में साल 2010 में 5,56,400 लोग कैंसर की वजह से मारे गए.

इनमें से 71 प्रतिशत लोगों की उम्र 30 से 69 वर्ष के बीच थी और सभी आयुवर्गों के बीच कैंसर से हुई मौतों का प्रतिशत छह था.

मुसलमान महिलाओं को कम खतरा

शोध के मुख्य बिंदु

  • पुरुषों की मौत की मुख्य वजह मुख का कैंसर
  • स्त्रियों की मौत की मुख्य वजह गर्भाशय का कैंसर
  • फेफड़े के कैंसर की तुलना में मुंह के कैंसर से ज्यादा मौतें
  • मुस्लिम औरतों में गर्भाशय कैंसर का खतरा 40 प्रतिशत कम
  • कैंसर से मृत्यु दर शहरी और ग्रामीण इलाकों में समान
  • अलग-अलग राज्यों में ये दर अलग-अलग
  • तम्बाकू चबाना मुंह के कैंसर की मुख्य वजह
  • भारत में कैंसर से होने वाली मौतों की दर अमरीका-ब्रिटेन से कम
  • तम्बाकू के सेवन की वजह से मृत्यु दर बढ़ने की आशंका

अध्ययन में पाया गया कि 30 से 69 वर्ष के पुरुषों की मौत की मुख्य वजह मुंह, पेट और फेफड़े का कैंसर था. वहीं औरतों की मौत की मुख्य वजह गर्भाशय, पेट और स्तन का कैंसर था.

तंबाकू की वजह से होने वाले कैंसर से लगभग 84,000 पुरुषों और लगभग 35,700 औरतों की मौत हुई.

अध्ययन में पाया गया कि फेफड़े के कैंसर की तुलना में मुंह के कैंसर से ज्यादा मौत हुईं. इसकी एक मुख्य वजह तंबाकू चबाने की आदत थी.

प्रति एक लाख व्यक्तियों पर ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर की वजह से होने वाली मृत्यु की दर शहरी और ग्रामीण इलाकों में समान थी. लेकिन अलग-अलग राज्यों में ये दर अलग-अलग थी.

इतना ही नहीं, ज्यादा पढ़े-लिखे वयस्कों की तुलना में कम पढ़े-लिखे वयस्कों में कैंसर की वजह से मृत्यु की दर दो गुना ज्यादा पाई गई.

वहीं हिंदू स्त्रियों के मुकाबले मुस्लिम औरतों में गर्भाशय का कैंसर 40 प्रतिशत कम पाया गया.

शोधकर्ताओं का कहना है कि शायद इसकी एक वजह मुसलमान पुरुषों में खतना दर अधिक होना है जिससे गर्भाशय कैंसर के एक कारक पैपिलोमा वायरस से संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.

भारत में कैंसर से होने वाली मौतों की दर अमरीका या ब्रिटेन की तुलना में कम है. लेकिन तम्बाकू के सेवन की वजह से भारत में ये दर बढ़ने की आशंका है.

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