झारखंड राज्यसभा चुनाव: आयोग ने की मतदान निरस्त करने की सिफारिश

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Image caption झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए पांच उम्मीदवार थे.

चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति से झारखण्ड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए शुक्रवार को हुए मतदान को निरस्त करने का अनुरोध किया है. आयोग ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को लिखे पत्र में पुनर्मतदान की सिफारिश की है.

आयोग की ये सिफारिश रांची में शुक्रवार की सुबह राज्यसभा के चुनाव के लिए मतदान शुरू होने से पहले 2.15 करोड़ रूपए की बरामदगी के बाद है.

आयकर विभाग ने रांची के नामकुम इलाके से एक कार से ये रक़म बरामद की है.

कहा जा रहा है कि ये रक़म राज्यसभा के एक निर्दलीय प्रत्याशी ने विधायकों का मत खरीदने के लिए जुटाई थी.

आयकर विभाग के अजय कुमार ने पत्रकारों को बताया कि इस संबंध में एक मामला दर्ज किया गया है और झारखण्ड के कई इलाकों में इसको लेकर छापामारी भी की जा रही है.

खरीद-फरोख्त के आरोप

इससे पहले झारखण्ड विकास मोर्चा के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी नें मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाक़ात कर बड़े पैमाने पर विधायकों की खरीद- फरोख्त का आरोप लगाते हुए यहाँ राज्य सभा के चुनाव को निरस्त करने की मांग की थी.

इसके बाद आयोग ने आयकर विभाग को चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों पर नज़र रखने के निर्देश जारी किए.

झारखण्ड में राज्य सभा के चुनाव हमेशा से ही बहस का केंद्र रहे हैं. ऐसे आरोप हैं कि कई बार राज्य के बाहर के लोग खास तौर पर पूंजीपति पैसे के बल पर राज्य सभा का चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं.

हाल ही में लंदन में रहने वाले एक अप्रवासी भारतीय अंशुमन मिश्र ने भी भारतीय जनता पार्टी से अपनी दावेदारी पेश की थी. बाद में पार्टी के अन्दर इसकी आलोचना हुई तो उनको अपना नामांकन वापस लेना पड़ा.

मगर मिश्र ने भाजपा के कुछ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए थे. अंशुमन मिश्र के प्रकरण के बाद भाजपा ने अपने विधायकों को निर्देश दिया कि वे मतदान में हिस्सा ना लें.

मतदान के लिए पहुंचे भाजपा के विधायक

मगर शुक्रवार को बड़े नाटकीय ढंग से दोपहर के दो बजे, सभी भाजपा विधायक प्रकट हुए और उन्होंने अपना मतदान किया.

अपनी पार्टी के विधायकों द्वारा मतदान किये जाने को लेकर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा नें आश्चर्य प्रकट करते हुए इस मामले को पार्टी में उठाने की बात कही.

अंशुमन मिश्र के नामांकन वापस लेने के बाद राज्यसभा की दो सीटों के लिए पांच उम्मीदवार बचे थे जिनमें दो निर्दलीय शामिल हैं.

जहाँ झारखण्ड मुक्ति मोर्चा नें संजीव कुमार को खड़ा किया है वहीं कांग्रेस की तरफ से प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू उम्मीदवार हैं.

झारखण्ड विकास मोर्चा ने अपनी पार्टी के महासचिव प्रवीन सिंह को खड़ा किया है. दो व्यवसायी आरके अग्रवाल और प्रदीप धूत भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे थे.

81 सदस्यों वाली झारखण्ड विधान सभा में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है. जब कोई भी दल सरकार बनाने में सक्षम नज़र नहीं आया तो सूबे में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था.

बाद में भारतीय जनता पार्टी और झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के गठबंधन ने मिलकर सरकार का गठन किया जिसमे छोटे दलों को भी शामिल किया गया.

भारतीय जनता पार्टी के पास 18 और झामुमो के पास भी 18 विधायक हैं. इसके अलावा इस गठबंधन को ऑल झारखण्ड स्टुडेंट्स यूनियन पार्टी के पांच विधायकों और दो निर्दलीय विधायकों का समर्थन हासिल है.

उसी तरह कांग्रेस के सिर्फ 13 विधायक है जबकि झारखण्ड विकास मोर्चा के पास 11 विधायक हैं.

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