ओडिशा संकट: बातचीत खत्म, इंतजार शुरु

चिदंबरम
Image caption पी चिदंबरम ने ओडिशा सरकार की माओवादियों के साथ बातचीत की पहल को सही ठहराया है.

ओडिशा में माओवादियों की ओर से बंधक बनाए गए एक इतालवी नागरिक बोसुस्को पाउलो और विधायक झीना हिकाका की रिहाई को लेकर मध्यस्थों और सरकार के बीच बातचीत अब खत्म हो गई है.

बीबीसी हिंदी के पत्रकार संदीप साहू के मुताबिक माओवादियों की ओर से मध्यस्थता कर रहे डॉक्टर बीडी शर्मा और दंडपानी महंती के अनुसार माओवादियों ने जो मांगें रखी हैं उसे पूरा करने के लिए सरकार को भी थोड़ा समय दिया जाना चाहिए ताकि वो सोच-समझ कर इस मामले में कानून के तहत निर्णय ले सके, माओवादी भी इस बात को समझते हैं.

हालांकि माओवादियों या सरकार दोनों ने इसके लिए कोई समय-सीमा तय नहीं की है.

बीबीसी पत्रकार को सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरकार एक सूची तैयार कर रही है जिसमें उन लोगों को रिहा करने की बात चल रही है जिनको मामूली कार्रवाई के तहत छोड़ा जा सके.

मांगें

इस बीच मध्यस्थों ने प्रेस के जरिए माओवादियों से निवेदन किया है कि बंधक इतालवी नागरिक बोसुस्को पाउलो को रिहा कर दें.

बंधकों की रिहाई को लेकर माओवादियों की दो मांगें हैं पहली ये कि जिन लोगों को एक बार कोर्ट द्वारा रिहा करने के बाद दोबारा कई मामलों में हिरासत में लिया गया था ऐसे पांच लोगों को रिहा किया जाए.

दूसरी उन पुलिस वालों के खिलाफ़ कार्रवाई हो जिन पर बलात्कार, हिरासत में मौत और फर्ज़ी एनकाउंटर के आरोप लगे हैं उन पर कार्रवाई हो.

इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि अगवा इतालवी नागरिक और विधायक को माओवादियों की कैद से रिहा करवाने के लिए बल प्रयोग किया जाए या नहीं इसका फैसला ओडिशा सरकार को लेना है.

दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान गृह मंत्री ने कहा ये फैसला सारे तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान रखकर लेना होगा और उसका सही निर्णय राज्य सरकार ही कर सकती है.

पी चिदंबरम ने ये बयान एक सवाल के जवाब में दिया.

उन्होंने ये भी कहा कि राज्य सरकार दोनों लोगों की रिहाई के लिए माओवादियों से बातचीत का जो सिलसिला जारी रखे हुए है वो सही है.

उन्होंने कहा, "दो लोग बंदी बनाकर रखे गए हैं इसलिए राज्य सरकार वार्ताकारों के जरिए सीपीआई (माओवादी) या ऐसे किसी भी संगठन से जिसने इन लोगों का अपहरण किया है जो बातचीत कर रही है वो सही है."

संपर्क

गृह मंत्री ने कहा कि इस मामले में उनकी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की कई दफा बातचीत हो चुकी है और गृह मंत्रालय के अधिकारी लगातार राज्य शासन के संपर्क में हैं.

पी चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री से बात की है और कहा है कि केंद्र सरकार इस मामले में हर तरह की मदद देने को तैयार है. हालांकि राज्य शासन ने अभी तक किसी खास किस्म की मदद नहीं मांगी है और उन्होंने सूचना के आदान-प्रदान को लेकर जो आग्रह किया था वो किया जा रहा है.

जब उनसे पूछा गया कि क्या ये केंद्र सरकार की उस नीति के खिलाफ नहीं है कि वो विद्रोहियों से तभी बातचीत में शामिल होंगे जब वो हिंसा रोक देते हैं पी चिदंबरम ने कहा कि ऐसा नही हैं कि बातचीत तभी होगी जब वो हिंसा छोड़ देते हैं.

उन्होंने कहा कि शर्त ये हैं कि जिस दौरान बातचीत जारी हो उस दौरान हिंसा पर रोक लगा दी जाए, लेकिन उन्होंने इस प्रस्ताव को मानने से इंकार कर दिया है.