ओडिशा: माओवादियों ने रखी पाँच अप्रैल की समयसीमा

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माओवादियों ने ओडिशा में अगवा किए गए बीजू जनता दल विधायक झीना हिकाका की रिहाई की शर्तें पूरी करने के लिए सरकार को ५ अप्रैल तक क़ी समयसीमा दी है.

बीबीसी सहित कुछ अन्य मीडिया संगठनों को मंगलवार को एक ऑडियो सन्देश भेजा गया है. इसमें सीपीआई (माओवादी) आंध्र ओडिशा बोर्डर स्पेशल जोनल कमिटी के सचिव चंद्रमौली ने कहा है कि कोरापुट और मलकानगिरी जिलों में झूठे मामलों में कैद चासी मुलिया आदिवासी संघ के कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमे वापस लेकर उन्हें जेल से रिहा करने के लिए राज्य सरकार तत्काल कदम उठाए

बिना किसी कारण मामले को खींचने की सरकार की नीति की कड़ी निंदा करते हुए चंद्रमौली ने उम्मीद जताई है कि सरकार अपना रवैया बदलेगी और खुले मन से बात पर गौर करेगी.

माओवादी नेता ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि विधायक की रिहाई के लिए सरकार से बातचीत के लिए मध्यस्थों की नियुक्ति उन्हें मंज़ूर नहीं.

इस बीच सीपीआई माओवादी की ओडिशा राज्य संगठनिक कमिटी के सचिव सब्यसाची पंडा का ऑडियो सन्देश मिलने के बाद सरकार फिर हरकत में आई और मध्यस्थों को बातचीत के लिए बुलाया.

इस संदेश में पंडा ने बंधक बनाए गए इतालवी नागरिक बोसुस्को पाओलो को रिहा करने के लिए मध्यस्थों कि अपील को ठुकराते हुए कहा था कि जब तक सात माओवादी और उनके समर्थकों को रिहा नहीं किया जाता, पाओलो को नहीं छोड़ा जाएगा.

इन सात नामों में चासी मुलिया आदिवासी संघ के सलाहकार गणनाथ पात्र और पंडा कि पत्नी शुभश्री सह्मिल हैं.

मध्यस्थ दंडपानी मोहन्ती ने बीबीसी को बताया कि पंडा की मांग पर सरकार के प्रतिनिधियों के साथ अभी कोई बात नहीं हुई है. क्योंकि दूसरे मध्यस्थ डॉ. बी.डी शर्मा एक पूर्व निर्धारित कार्यक्रम में शामिल होने जमशेदपुर गए हैं, इस लिए बात चीत बुधवार को ही दुबारा शुरू हो पाएगी.

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