'वोट चाहिए तो शपथ पत्र दो'

Image caption दिल्ली नगरनिगम के चुनाव 15 अप्रैल को होने हैं.

चुनाव में वोट बटोरने के लिए राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का घोषणापत्रों के बारे तो हम सब जानते हैं. लेकिन क्या आपने कभी मतदाताओं के घोषणा पत्रों के बारे में भी सुना है?

ये शुरुआत हुई है 15 अप्रैल को होने वाले दिल्ली नगरनिगम चुनावों में और इसके पीछे हैं शहर के निवासी कल्याण संघ यानी रेज़ीडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन्स.

इस पहल के तहत शहर की कई आरडब्लयूए न सिर्फ़ लोगों को वोटिंग करने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं बल्कि सही उम्मीदवार को चुनने के लिए अपने-अपने इलाके के उम्मीदवारों के साथ बैठकें, विचार-विमर्श और वाद-विवाद भी आयोजित करा रही हैं.

इन बैठकों में मतदाता उम्मीवार से उनके एजेंडा और अपने इलाके से जुड़ी विशिष्ट समस्याओं के बारे में सवाल कर रहे है और उम्मीदवारों से विस्तार में जवाब-तलब कर रहे हैं.

शपथपत्र

पंकज अग्रवाल दिल्ली आरडब्लूयए ज्वाइंट फ्रंट के सचिव हैं. ये संस्था दिल्ली के लगभग 300 आरडब्लूयूए का प्रतिनिधित्व करती है.

पंकज अग्रवाल ने बीबीसी को बताया, “शहर में नागरिक सेवाएं इतनी ज़्यादा ख़राब हो चुकी हैं कि अब लोगों को महसूस करने लगे हैं कि अगर वो ख़ुद बढ़कर काम-काज में हिस्सा नहीं लेंगे तो उनके इलाके और शहर की हालत और भी ख़राब हो जाएगी. इसी को ध्यान में रखते हुए आरडब्लयूए ने इस बार कुछ पहल की है.”

इस पहल में नागरिकों द्वारा अपने इलाके या वॉर्ड का घोषणापत्र बनाना शामिल हैं.

पंकज कहते हैं, “हम उम्मीदवारों को बुलाकर उनके साथ बैठकें कर रहे हैं. साथ ही वॉर्ड एजेंडा या वॉर्ड का घोषणापत्र ख़ुद बनाया है. इसके लिए इलाके के रेसीडेंट वेलफ़ेयर एसोसिएशन्स, स्कूल, धार्मिक संस्थान आदि से पूछा गया कि वो अपने इलाके में क्या-क्या चाहते हैं. घोषणापत्र को लागू करने के लिए उम्मीदवार एक शपथपत्र पर दस्तख़त करेंगे कि वो जनता के साथ मिलकर काम करेंगे. और हर महीने पार्षद और नागरिक मिलकर फ़ैसला करेंगे कि क्या काम करने हैं और कैसे करने हैं आदि. चुनाव से पहले तो उम्मीदवार हमारे पीछे भागते हैं लेकिन उसके बाद काम कराने के लिए हमें उनके पीछे भागना पड़ता है. तो इस तरह से हम जवाबदेही की प्रणाली तैयार कर रहे हैं.”

जवाबदेही

नागरिकों और आरडब्लयूए को जागरूक करने और भावी पार्षदों को जवाबदेह बनाने की दिशा में ग़ैरसरकारी संस्था लेट्स डू इट इंडिया भी एक अहम भूमिका निभा रही है.

नागरिकों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने के अलावा उम्मीदवारों से शपथपत्र पर हस्ताक्षर कराना भी इसी संस्था की पहल है.

इस संस्था की अनिता भार्गव कहती हैं कि इस तरह की पहल एक शुरुआत है.

वो कहती हैं, “इस नगर निगम चुनाव में शायद बहुत बड़ा बदलाव न हो लेकिन कुछ निकायों में तो बदलाव होगा ही. आगे जा कर 2014 विधानसभा चुनाव हैं जब ये प्रयोग दोहराया जा सकता है. असली मुद्दा ये है कि हमारे नेताओं को हमारे प्रति जवाबदेह होना चाहिए.”

पंकज अग्रवाल कहते हैं कि जहां जनता में इस तरह की शुरुआत को लेकर उत्साह है, वहीं उम्मीदवारों में अब तक मिली जुली प्रतिक्रिया रही है.

उम्मीदवारों को सवाल-जवाब और बैठकों से परहेज़ नहीं हो, लेकिन लिखित जवाबदेही के लिए सभी नेता तैयार नहीं हैं. और ये भी ज़रूरी नहीं है कि चुने जाने के बाद पार्षद उस शपथपत्र का मान रखे.

पंकज का कहना था, “अगर ऐसा होता है तो लोग पार्षद पर दबाव डाल सकते हैं क्योंकि जनता का दबाव सबसे बड़ा दबाव होता है. आजकल लोगों में बहुत जागरूकता आ गई है कि अगर पार्षद मुकर जाता है तो आगे उन्हीं को मुश्किलें होंगीं.”

संबंधित समाचार