भारतीय नौसेना में शामिल हुई रूसी पनडुब्बी

पनडुब्बी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption 'नेरपा' पनडुब्बी के लिए भारत ने रूस के साथ 2004 में एक करार पर हस्ताक्षर किए थे.

भारत उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जिनकी नौसेना में परमाणु ईंधन से संचालित पनडुब्बियां मौजूद हैं.

लगभग एक अरब डॉलर की लागत से तैयार हुई इस पनडुब्बी को रूस ने भारत को दस साल के लिए पट्टे पर दिया है.

'नेरपा' नाम वाली इस पनडुब्बी को भारत ने आईएनएस चक्र II का नाम दिया है.

हालांकि इससे पहले भी भारत के पास एक परमाणु पनडुब्बी थी जिसे साल 1991 में नौसेना से हटा लिया गया था.

उस पनडुब्बी का भी निर्माण सोवियत यूनियन में ही हुआ था.

परमाणु ईंधन से संचालित इस तरह की पनडुब्बी भारत के अलावा सिर्फ चीन, अमरीका, रूस, इंग्लैंड और फ्रांस के पास है.

परमाणु हथियार

अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधियों को ध्यान में रखते हुए पनडुब्बी को परमाणु हथियार से लैस नहीं किया जाएगा.

'नेरपा' पनडुब्बी के लिए भारत ने रूस के साथ 2004 में एक करार पर हस्ताक्षर किए थे.

हालांकि इसको कई साल पहले ही भारतीय नौसेना में शामिल किया जाना था लेकिन इस पनडुब्बी के परीक्षण के समय एक हादसा हो गया था जिसमें कई रूसी सैनिकों की मौत हो गई थी.

उस हादसे के बाद पनडुब्बी को भारत लाना कुछ समय के लिए टाल दिया गया था.

विशाखापट्टनम में मौजूद बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदार के मुताबिक़ इस पनडुब्बी के भारतीय नौसेना में आखिरकार शामिल हो जाने से नौसेना को नया बल मिलेगा.

इस पनडुब्बी की विशेष बात यह है कि इसमें एक बार में लगातार तीन महीने तक समुद्र के भीतर जलमग्न रहने की क्षमता है.

हालांकि भारत पिछले कुछ समय से एक परमाणु पनडुब्बी के घरेलू निर्माण में भी लगा रहा है.

संबंधित समाचार