ट्रैजेडी से निकलती है कॉमेडी: सुरेन्द्र शर्मा

 बुधवार, 4 अप्रैल, 2012 को 05:29 IST तक के समाचार
सुरेन्द्र शर्मा

हास्य कवि सम्मेलनों में अपनी कविताओं से लोगों को गुदगुदाते आ रहे सुरेन्द्र शर्मा का मानना है कि हास्य का स्तर गिरा है.

कई दशकों से अपनी हास्य कविताओं से लोगों को गुदगुदाते आ रहे कवि सुरेन्द्र शर्मा का मानना है कि अच्छा कॉमेडियन बनने के लिए व्यक्ति में खूबियों की बजाए कमियां होना ज्यादा जरूरी है.

पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित एक हास्य समारोह में हिस्सा लेने आए सुरेन्द्र शर्मा ने कहा कि कलाकार की आवाज या शक्ल जितनी अजीब हो उतनी ही आसानी होती है लोगों को हंसाने में.

उन्होंने कहा, "कॉमेडियन बनने के लिए खूबियों से ज्यादा जरूरत कमियों की होती है. खूबियां हुई तो कुछ और भी कर सकते है. आवाज से जो हास्य पैदा करना चाहता है उसकी आवाज हास्यास्पद होनी चाहिए. सबसे जरूरी बात ये कि एक कॉमेडियन में कभी भी निराशा की भावना नहीं होनी चाहिए, वर्ना वो लोगों को हंसा नहीं सकता."

'कीमत बढ़ी है इज्जत नहीं'

अपनी पंक्तियों से हर उम्र के लोगों को रिझाने और उनका मनोरंजन करने का माद्दा रखने वाले सुरेन्द्र शर्मा कहते है कि अच्छी कॉमेडी के लिए ट्रैजेडी का इनपुट भी जरूरी है.

सुरेन्द्र शर्मा ने कहा, "किसी एक व्यक्ति की ट्रैजेडी दूसरे के लिए कॉमेडी बन जाती है. लेकिन एक हास्यकार को ये हमेशा याद रखना चाहिए कि हास्य किसी का उपहास न बने."

उनका मानना है कि हास्य के क्षेत्र में नए लोगों के लिए असीमित मौके है बशर्ते उनका कंटेंट बिल्कुल नया हो.

सुरेन्द्र शर्मा कहते हैं, "हास्य के क्षेत्र में बहुत से मौके मौजूद हैं, दूर दूर तक सब खाली पड़ा हुआ है. नए लोगों के लिए पर्याप्त मौके हैं, लेकिन उनकी कृति में नयापन होना चाहिए. सिर्फ दूसरों की कृतियां कॉपी-पेस्ट, जोड़ घटाकर पेश करने से काम नहीं चलेगा."

हास्य में ‘अश्लीलता’

सुरेन्द्र शर्मा का मानना है कि स्टैंड-अप कॉमेडी से हास्य में अश्लीलता को बढ़ावा मिला है.

उनका कहना है, "मजा उसी कॉमेडी में आता है जिसे आप अपने परिवार के साथ मिलकर देख सके. तभी वो सुकून भी देता है. स्टैंड-अप कॉमेडी से हास्य को कोई खास फायदा नहीं पहुंचा है बल्कि उसका स्तर गिरा ही है. द्विअर्थी भाषा का प्रयोग करके जबरदस्ती हंसाने की कोशिश की जाती है."

पापा सीजे

स्टैंड अप कॉमेडी कलाकार पापा सीजे हास्य के क्षेत्र में काफी लोकप्रिय रहे है.

हास्य के बहाने दर्शकों के सामने अश्लीलता परोसने का आरोप पहले भी हास्यकारों पर लगते रहें है.

हालांकि इस मुद्दे पर जाने-माने स्टैंड-अप कॉमेडियन पापा सीजे का मानना है कि हास्य कवि सम्मेलन और स्टैंड अप कॉमेडी को एक चश्मे से देखना ठीक नहीं है.

उन्होंने कहा, "कवि सम्मेलन और स्टैंड अप कॉमेडी हास्य परोसने का दो अलग तरीका है. दोनों की अपनी-अपनी खासियत होती है."

सुरेन्द्र शर्मा का कहना है कि टेलीविजन पर दिखने वाले कॉमेडी कार्यक्रमों से कलाकारों की कीमत तो बढ़ी है लेकिन इज्जत नहीं.

अब तक अनगिनत मंचो पर अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके सुरेन्द्र शर्मा का मानना है कि हास्य वहीं अच्छा होता है जिससे किसी का दिल ना दुखे.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.