भारतीय कामगारों के लिए यूएई जाना सुरक्षित होगा

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Image caption खाडी़ के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम की तलाश में जाते हैं

खाड़ी के देशों में काम करने गए भारतीयों की शोषण की ढेरों घटनाओं के बाद आखिर भारत सरकार ने इसे सुधारने की कोशिशें शुरु कर दी हैं.

इसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुए एक समझौते के अनुसार अब वहाँ काम करने जाने वाले भारतीयों को नियमित वेतन और काम की बेहतर परिस्थितियाँ मुहैया हो सकेंगीं.

इस समझौते के अनुसार ये अनिवार्य कर दिया गया है कि यूएई रवाना होने से पहले भारतीय अधिकारी कर्मचारी और नियोक्ता के बीच होने वाले वर्क कॉन्ट्रैक्ट यानी कार्य अनुबंध पत्र की जाँच करेंगे.

यूएई भारतीयों के लिए आजीविका कमाने के लिए जाने के लिए यूएई एक पसंदीदा जगह है. वहाँ काम कर रहे कुशल और अकुशल भारतीय कर्मचारियों की संख्या 17 लाख तक जा पहुँची है.

पारदर्शी व्यवस्था

भारत में विदेश में रह रहे भारतीयों के मामलों के मंत्री वायलार रवि और यूएई के श्रम मंत्री सक़्र ग़ोबाश ने बुधवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर किए.

इस समझौते के अनुसार इसके बाद कर्मचारी और नियोक्ता के बीच अनुबंध को इलेक्ट्रॉनिक ढंग से पंजीकृत करवाना होगा और इसका अनुमोदन लेना होगा.

सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, "इस समझौते के अनुसार किसी भी भारतीय कर्मचारी के यूएई रवाना होने से पहले उसके काम की शर्तों या अनुबंध को कर्मचारी, नियोक्ता और सक्षम भारतीय अधिकारी की ओर से मंजूरी ज़रूरी होगी."

इसके बाद इस अनुबंध को यूएई के श्रम विभाग में पंजीकृत भी करवाना होगा.

केंद्रीय मंत्री वायलार रवि ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे कर्मचारियों और नियोक्ता दोनों को फायदा होगा.

जबकि यूएई के श्रम मंत्री ने कहा है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता होगी और यूएई रवाना होने से पहले ही भारतीय कर्मचारियों को ये पता चल सकेगा कि उसके कार्य की परिस्थितियाँ क्या हैं और उसे इस काम के लिए कितना पैसा मिलेगा.

इससे पहले खाड़ी के देशों से लगातार शिकायतें मिलती रही हैं कि रोजगार की तलाश में वहाँ पहुँचे भारतीय कामगारों का वहाँ शोषण हो रहा है.

शिकायतें रही हैं कि किसी अनुबंध के अभाव में अक्सर नियोक्ता कामगारों को मनमाने समय तक काम करवाते हैं और उन्हें ठीक तरह से भुगतान भी नहीं करते.

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