टुकड़ियों के दिल्ली कूच की खबर- सरकार ने कहा बकवास, अखबार रिपोर्ट पर कायम

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Image caption प्रधान मंत्री ने कहा है कि ये सभी की जिम्मेदारी है कि ऐसा कुछ भी नहीं किया जाए जिससे सेना प्रमुख के पद की गरिमा कम होती हो.

सैन्य टुकड़ियों के दिल्ली कूच करने की इंडियन एक्सप्रेस की खबर को सरकार ने जहाँ 'बकवास' बताया है वहीं अखबार ने बयान जारी करके कहा है कि वह अपनी रिपोर्ट पर कायम है.

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार ने बुधवार को बड़ी सी सुर्खी में खबर छापी कि जनवरी महीने की 16 तारीख की रात को सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना दिल्ली के आस-पास सेना की दो टुकड़ियां जमा हुई थीं.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने टुकड़ियों के दिल्ली कूच करने की खबर को एक ‘भय उत्पन्न’ करने वाली खबर बताया है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से ये खबर प्रकाशित की गई है उसे उसी तरह से नहीं देखा जा सकता.

मनमोहन सिंह ने पत्रकारों से कहा, “ये भय पैदा करने वाली खबरें है. इन्हें उस तरह से नहीं देखा जा सकता है जिस तरह इन्हें छापा गया है.”

सरकार और सेनाध्यक्ष वीके सिंह के बीच विवाद की खबरों के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने कहा है कि ये सभी की जिम्मेदारी है कि सेना प्रमुख के पद की गरिमा को कम करने की कोशिश नहीं की जाए.

इधर समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस ने बयान में कहा, ''छह हफ्तों की जांच के बाद लिखे गए इस रिपोर्ट के लिए जानकारियां विश्वस्त सूत्रों से जुटाई गई है. इंडियन एक्सप्रेस ने सेना और रक्षा मंत्रालय को कुछ सवाल भेजे थे, जिनके जवाबों के आधार पर ही ये रिपोर्ट तैयार की गई. इंडियन एक्सप्रेस अपनी रिपोर्ट पर कायम है.''

अखबार की रिपोर्ट

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Image caption रिपोर्ट में कहा गया है कि 16 जनवरी की रात को सरकार को पूर्व सूचना दिए बिना दिल्ली के आसपास सेना की दो टुकड़ियां जमा हुई थीं.

अखबार के संपादक शेखर गुप्ता की बाईलाइन से प्रकाशित खबर में दावा किया गया है कि एक 'टेरर अलर्ट' घोषित किया गया, प्रधानमंत्री को 17 जनवरी को तड़के बताया गया और डायरेक्टर जनरल मिलिटरी ऑपरेशन्स से इन टुकड़ियों को वापस जाने का आदेश देने के लिए कहा गया.

रक्षा मंत्री एके एंटनी ने अखबार की रिपोर्ट को आधारहीन बताया और कहा कि सेना ऐसा कुछ भी नहीं करेगी जिससे लोकतंत्र को नुकसान पहुँचे.

एके एंटनी ने कहा, “ये बिल्कुल निराधार है. सेना ने इस बारे में अपनी सफाई पहले ही दे दी है. ये एक आम तरह की गतिविधि थी. कुछ भी असामान्य नहीं था. हमें सेना की देशभक्ति पर पूरा भरोसा है. उनकी देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए. वो ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे लोकतंत्र को नुकसान पहुंचे.”

सैन्य मामलों के जानकारों ने भी बीबीसी से बातचीत में अखबार के रिपोर्ट की सत्यता पर सवाल खड़े किए.

जानकारों की राय

बीबीसी से बातचीत में सेवानिवृत्त मेजर जनरल अशोक मेहता ने कहा, "परिस्थितियों के आधार पर ये कहानी पेश की जा रही है कि एक नाराज़ सेनाध्यक्ष हैं जो सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं और कुछ युनिट्स को उन्होंने ट्रेनिंग के लिए बुलवाया है, इससे क्या मतलब निकाला जाए. अख़बार ने एक किस्म से कहानी को लटका कर रख दिया है. लेकिन सेना के एक पूर्व अफ़सर की हैसियत से मैं कह सकता हूं कि ऐसे तख़्ता पलट नहीं होता."

इंडियन एक्सप्रेस में कहा गया है कि रात में हुई इस घटना के बारे में प्रधानमंत्री को तड़के जगा कर ये खबर दी गई थी और रक्षा सचिव को मलेशिया की यात्रा से बीच में ही वापस बुला लिया गया था.

बीबीसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय के सूचना सलाहकार पंकज पचौरी से सीधा सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री को सुबह जगा कर इस बारे में जानकारी दी गई थी तो उनका कहना था, ‘‘ नहीं. ये सब बकवास है. सेना पहले ही इसका खंडन कर चुकी है.’’

इंडियन एक्सप्रेस की खबर में दो तीन मोटी-मोटी बातों का उल्लेख किया गया है जिनके अनुसार हिसार से सेना की टुकड़ी दिल्ली के नजफगढ़ तक आई थी जबकि आगरा से एक यूनिट हिंडन तक पहुंची थी.

दावा

आम तौर पर सेना की टुकड़ियों के अभ्यास की खबर सरकार को पहले से ही दी जाती है लेकिन अख़बार का दावा है कि इस मामले में ऐसा नहीं हुआ था.

अख़बार के प्रधान संपादक शेखर गुप्ता के नाम से छपी इस खबर में दावा किया गया है कि खुफिया एजेंसियों से जानकारी मिलने के बाद सरकार ने आतंकवाद संबंधी अलर्ट भी जारी किया था ताकि सड़कों पर यातायात को धीमा किया जा सके.

अख़बार ने सेना की प्रतिक्रिया भी दी है जिसमें मेजर जनरल एसएल नरसिम्हन (अतिरिक्त महानिदेशक, सार्वजनिक सूचना) ने कहा है ऐसा हुआ था लेकिन ये रुटीन अभ्यास का हिस्सा है और कोहरे में सेना की तैयारियों का जायजा लेने के लिए यह अभ्यास किया गया था.

अख़बार के अनुसार यह घटना उसी रात की है जब सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने अपने जन्म तिथि को लेकर हो रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा़ खटखटाया था.

अख़बार की यह खबर ऐसे समय में आई है जब पिछले कुछ दिनों से सेनाध्यक्ष वीके सिंह और सरकार के बीच तनातनी बढ़ती रही है.

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