माओवादियों की माँग, उनकी सूची वाले लोगों को छोड़ा जाए

(फाइल)
Image caption माओवादी नेता ने कहा है कि अगर इतालवी नागरिक को कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. (फाइल फोटो: बंधक बनाए गए बोसुस्को पाओलो)

ओडिशा में इतालवी पर्यटक बंधक मामले में सरकार के लिए संकट और गहराता दिख रहा है.

माओवादी नेता सब्यसाची पांडा ने एक संदेश जारी कर कहा है कि इतालवी पर्यटक को तब तक नहीं छोड़ा जाएगा जब तक सरकार उनकी सूची वाले सात कैदियों को नहीं छोड़ देती.

मांगे पूरी करने के लिए माओवादियों ने 96 घंटे की नई समय सीमा निर्धारित की है.

पाओलो की रिहाई के लिए सीपीआई माओवादी ओडिशा राज्य सांगठनिक कमिटी के सचिव सब्यसाची पांडा ने अपने अंतिम सन्देश में चासी मुलिया आदिवासी संघ के सलाहकार 80 वर्षीय गणनाथ पात्र सहित सात लोगों कि रिहाई कि मांग की थी, जिनमें से सरकार केवल चार को छोड़ने पर राज़ी हुई.

अपने तल्ख संदेश में सब्यसाची पांडा ने कहा है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है और ऐसे में अगर इतालवी नागरिक को कुछ हो गया तो इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.

इससे पहले राज्य सरकार ने जेलों में बंद 27 कैदियों की रिहाई की घोषणा गुरुवार को की थी. जिसके बाद माओवादियों से प्रतिक्रिया का इतंज़ार था.

समय सीमा

इस बीच इतालवी बंधक बोसुस्को पाओलो की रिहाई के लिए माओवादियों द्वारा नियुक्त दोनों मध्यस्थों ने शुक्रवार सुबह राज्य सरकार के तीन आला अधिकारियों के साथ बातचीत की. बातचीत के बाद मध्यस्थों ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से जारी की गई सूची के बारे में उन्हें कुछ नहीं कहना है.

मध्यस्थों ने कहा है कि शुक्रवार की बातचीत में उन्होंने सरकार से मुख्यमंत्री नवीन पटनायक द्वारा गुरुवार को विधान सभा में दिए गए बयान में इस्तेमाल किये गए 'फेसिलिटेट' शब्द के बार में स्पष्टीकरण माँगा है.

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि सरकार 27 कैदियों की रिहाई को 'फेसिलिटेट' करेगी.

राज्य में इस बात को लेकर भी चर्चा ज़ोरों पर थी कि राज्य सरकार विधायक की रिहाई के लिए जहाँ 23 कैदियों को छोड़ने के लिए तैयार हो गई, वहीं इतालवी पर्यटक के बदले केवल चार लोगों को ही छोड़ने पर राज़ी हुई.

लोगों को यह बात सबसे अधिक खटक रही है कि पाओलो कि रिहाई के बदले गणनाथ पात्र को छोड़ना सरकार को मंज़ूर नहीं था.

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