'पिछली बार से थोड़ा गमगीन दिखे जरदारी'

 रविवार, 8 अप्रैल, 2012 को 20:50 IST तक के समाचार
जरदारी

जरदारी दूसरी बार अजमेर शरीफ आए हैं.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनुददिदीन हसन चिश्ती के दरगाह पर जियारत की और उनकी पवित्र मजार पर अपने अकीदत के फूल पेश किए.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति के ओर से दरगाह के लिए एक मिलियन डॉलर यानी भारतीय रूपये में लगभग 5 करोड़ दान देने की घोषणा की गई.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति के साथ उनके बेटे बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी जियारत की.

प्रधामनंत्री की ओर से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने मजार पर मखमली चादर चढाई.

पारंपरिक स्वागत

जरदारी के दरगाह आने पर उनका उसी तरह से पारंपरिक स्वागत किया गया जैसा सम्राट अकबर से लेकर आज तक के राष्ट्राध्यक्षों का होता है.

शाम 4.40 बजे जैसे ही जरदारी और उनकी टीम दरगाह की सीढियां चढने लगे तो दरगाह के अकबरी दरवाजे से नगाड़े बजने लगे. बुलन्द दरवाजे पर उन्होंने अपनी ओर से चढ़ाई जाने वाली चादर सर पर रखी.

मजार पर उन्होंने चादरें चढाई और दुआ मांगी.

राष्ट्रपति के साथ पाकिस्तान के गृह मंत्री रहमान मलिक, सीनेटर फारूख एच नाईक सहित 26 सदस्यों वाली प्रतिनिधि मंडल ने भी जियारत की.

‘गमगीन’

"उस वक्त एक खुशी थी दूसरी, आज वो खुशी उनके चेहरे पर नहीं थी. चेहरे से जो तास्सुर दिख रहे थे वो थोड़ी गमगीन दिख रहे थे."

हाजी सय्यद कलीमुद्दीन

जरदारी दूसरी बार अजमेर शरीफ आए हैं. इससे पहले वो साल 2005 में बेनजीर भुट्टो के साथ आए थे. दोनों मौको पर यहां के एक खादिम हाजी सय्यद कलीमुद्दीन मौजूद थे.

उन्होंने कहा, “उस वक्त एक खुशी थी दूसरी, आज वो खुशी उनके चेहरे पर नहीं थी. चेहरे से जो तास्सुर दिख रहे थे वो थोड़ी गमगीन दिख रहे थे. पहले वे बेनजीर के साथ थे आज वो बिलावल के साथ थे, दोनों में फर्क था.”

जरदारी के साथ बिलावल ने भी हाजिरी दी, जियारत की और दुआएं खैर की.

दरगाह कमिटी की ओर से दरगाह के बुलंद दरवाजे पर राष्ट्रपति जरदारी को तलवार भेंट की गई और दस्तारबंदी कर तबर्रुख भेंट किया.

यहां के खादिम से उन्होंने थोड़ी देर बात भी की.

हाजी सय्यद कलीमुद्दीन ने कहा कि अजमेर यहां आकर उन्होंने भाईचारे का पैगाम दिया. कलीमुद्दीन ने कहा, “उन्होंने कहा कि यहां आकर जो मुझे कलमी सुकुन मुला उसे में लफ्जों में बयान नहीं कर सकता. दुआ करता हूं कि पूरी इंसानियत को अमनोचैन मिले.”

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