एसआईटी रिपोर्ट में मोदी को क्लीन चिट

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Image caption नरेंद्र मोदी को एसआईटी की रिपोर्ट से राजनीतिक राहत मिल सकती है

अहमदाबाद की एक अदालत ने कहा है कि गुजरात दंगों को लेकर दायर जकिया जाफरी मामले में विशेष जाँच टीम (एसआईटी) को मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले हैं.

अदालत ने कहा है कि नरेंद्र मोदी के अलावा उन लोगों के खिलाफ भी कोई सबूत नहीं मिले हैं जिनके खिलाफ जकिया जाफरी ने शिकायत की थी.

अपने एक फैसले में अदालत ने एसआईटी की रिपोर्ट 30 दिनों के अंदर मुख्य शिकायतकर्ता जकिया जाफरी को सौंपने का निर्देश देते हुए कहा कि एसआईटी ने इस मामले में अपनी 'क्लोजर रिपोर्ट' सौंप दी है.

वर्ष 2002 में गुजरात में हुए दंगों के दौरान अहमदाबाद के गुलबर्ग सोसायटी में जकिया जाफरी के पति और पूर्व सांसद अहसान जाफरी सहित 69 लोग मारे गए थे.

इस नरसंहार की जाँच एसआईटी अलग से कर ही रही थी लेकिन जकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि इस हत्याकांड के लिए नरेंद्र मोदी सहित 62 लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज की जाए और उनकी भूमिका की जाँच की जाए.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी ने इस मामले की जाँच की थी.

'एक दिन सच ज़रुर सामने आएगा'

जकिया जाफरी ने एसआईटी की रिपोर्ट पर दुख व्यक्त किया है और निराशा जताई है.

जकिया ने कहा, "मुझे कानून पर भरोसा है. एक दिन सच जरूर समाने आएगा. ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं है."

जकिया जाफरी के बेटे तनवीर जाफरी ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "भारत में कितने बड़ी भी हादसे हों, कितना बड़ा भी कत्लेआम में कोई शामिल हो, उनके विरुद्ध केस करना बड़ी मुश्किल बात है. ये रिपोर्ट यही साबित करती है. अगर पीड़ित व्यक्ति के पास ताकत नहीं हो, तो वो कभी भी गुनहगारों को सज़ा नहीं दिला सकेंगे. ये रिपोर्ट यही बताती है."

उनका कहना था, "इस रिपोर्ट के आने से हमारे लिए काम ज़रूर बढ़ता है, फिर भी हम उसके लिए तैयार हैं. कॉपी मिलने के बाद हमारे वकील उस पर अपनी जिरह तैयार करेंगे कि एसआईटी के सामने कितने सुबूत हैं, किनकी जाँच हुई है, औऱ किनकी नहीं हुई है. हम अपना पक्ष सामने रखेंगे."

तनवीर जाफरी ने कहा, "एसआईटी ने अपना पक्ष रखा है. एसआईटी ने कितनी जाँच की है, ये हमें मालूम भी नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के एमाइकस क्यूरी रामचंद्रन ने कहा था कि ऐसे सुबूत सामने हैं जिनके आधार पर मुकदमा चलाया जा सके. इसके बावजूद भी अगर एसआईटी ने ये बात रखी है तो ये देखकर मुझे बहुत हैरानी होती है."

"मुख्यमंत्री के विरुद्ध सुबूत मिलना कोई मामूली काम नहीं है. ये मुश्किल काम है. जो कुछ भी छोटा मोटा सुबूत था, तो उसे एसआईटी को हमारे पक्ष में लेना चाहिए था."

इस मामले में जकिया जाफरी के साथ खड़ी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "आरंभिक रुप से तो ये हमारी जीत है क्योंकि अदालत ने हमें रिपोर्ट की प्रति देने के निर्देश दिए हैं."

उन्होंने एक टीवी चैनल से कहा, "अब हम अदालत के पास न्याय मांगने जाएँगे और हमें न्याय जरुर मिलेगा क्योंकि जाँच एजेंसी तो हमें न्याय दिलवाने में विफल रही है."

'मोदी की छवि खराब करने की कोशिशें रुकें'

लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने की कोशिश रुकनी चाहिए.

भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "गुलबर्ग सोसाइटी में जो हुआ था, वो दुर्भाग्यपूर्ण था. दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन इससे नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए."

उधर एसआईटी के प्रमुख आरके राघवन ने बीबीसी से हुई बातचीत में कहा, "हमारी जवाबदेही अदालत के प्रति है. मैं इस पर कोई टिप्पणी या आलोचना नहीं करना चाहता. निचली अदालत या सुप्रीम कोर्ट हमसे जो करने के लिए कहेंगी हम वो करेंगे."

उन्होंने कहा, "हमने नौ मामलों की जाँच की है. इनमें से तीन में अदालत हमारी जाँच को सही ठहरा चुकी है और सज़ा सुनाई है. छह मामलों में अभी फैसला आना शेष है."

अब क्या होगा

अहमदाबाद की अदालत ने यह तो कहा है कि एसआईटी ने अपनी क्लोज़र रिपोर्ट सौंप दी है लेकिन अभी अदालत ने ये नहीं कहा है कि वह एसआईटी की रिपोर्ट को स्वीकार कर रही है या नहीं.

अदालत चाहे तो इस रिपोर्ट को स्वीकार या अस्वीकार कर सकती है.

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Image caption जकिया जाफरी को एसआईटी की जाँच से पहले भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था

उधर इस रिपोर्ट की प्रति मिलने के बाद जकिया जाफरी के पास ये विकल्प होगा कि वे इस रिपोर्ट के खिलाफ उच्च अदालतों का दरवाजा खटखटाएँ.

जकिया जाफरी कई वर्षों से इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं. फरवरी में एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सह याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ को देने का विरोध किया था.

लेकिन एसआईटी ने ये भी स्पष्ट किया था कि अदालत ये फैसला करे कि क्या ये रिपोर्ट मुख्य शिकायतकर्ता जकिया जाफरी को दी जाए या नहीं.

उस समय अदालत ने ये कहते हुए एसआईटी की रिपोर्ट देने से इनकार किया था कि अभी एसआईटी को जाँच से संबंधित अतिरिक्त दस्तावेज पेश करने हैं.

एसआईटी ने 15 मार्च तक अतिरिक्त दस्तावेज अदालत को सौंप गए, जिसके बाद जकिया जाफरी ने फिर रिपोर्ट हासिल करने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया.

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