20 साल बाद जेल से निकले खलील चिश्ती

 बुधवार, 11 अप्रैल, 2012 को 18:39 IST तक के समाचार
खलील चिश्ती

सुप्रीम कोर्ट से मिली ज़मानत के बाद पाकिस्तान के नागरिक खलील चिश्ती को अजमेर की जेल से रिहा कर दिया गया है.

जमानत के आदेश पहुँचने के बाद जेल अधिकारियों ने बुधवार को 81 वर्षीय डॉक्टर खलील चिश्ती को रिहा कर दिया.

अपनी रिहाई के बाद बीबीसी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "मैं बहुत खुश हूँ कि करीब 20 साल के बाद खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला है. "

उन पर वर्ष 1992 में राजस्थान के अजमेर शहर में हत्या का अभियोग है जिसके लिए उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई थी.

दो दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय आधार पर उन्हें जमानत तो दे दी लेकिन अजमेर शहर छोड़कर जाने की अनुमति नहीं दी.

'रियाटर हो गया हूँ'

"मैंने तय कर लिया है कि मैं रिटायर हो गया हूँ. अगर मुझे किसी की मदद करने का या काम करने का मौका मिलेगा तो मैं करता रहूँगा. मेरा ख्याल है कि मैं दस साल और ज़िंदा रहूँगा और इस दौरान किसी को अगर लूट का माल चाहिए तो आकर ले जाए"

खलील चिश्ती

अजमेर में ही जन्में डॉक्टर चिश्ती अब अपने शहर से बेज़ार से दिखे. उन्होंने बीबीसी को बताया, "अजमेर तो मेरा पैदाइशी मकाम है. अब ये अजमेर नहीं रहा जो मेरे बचपन में था. हर चीज़ की कमी हो गई है. पानी की, फसलों की सब्ज़े की. सारे जंगल काट दिए हैं. ऐसी फटीचर जगह हो गई है ये."

करीब 20 वर्ष जेल में बिताने के उनके अनुभवों के सवाल पर उन्होंने कहा, "जेल का कोई खट्टा और मीठा अनुभव नहीं होता. वहाँ तो नमक भी नहीं मिलता. खाना जैसा मिल रहा है तो खा लीजिए, अगर शिकायत करेंगे तो फिर आपकी परेशानी ही बढ़ेगी."

भविष्य की योजना के बारे में उन्होंने कहा, "मैंने तय कर लिया है कि मैं रिटायर हो गया हूँ. अगर मुझे किसी की मदद करने का या काम करने का मौका मिलेगा तो मैं करता रहूँगा. मेरा ख्याल है कि मैं दस साल और ज़िंदा रहूँगा और इस दौरान किसी को अगर लूट का माल चाहिए तो आकर ले जाए."

पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय क़ैदी सरबजीत और भारत में बंद दूसरे पाकिस्तानी क़ैदियों से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा, "मेरे मामले को फाइनल नहीं समझा जाए. जब तक मुझे अपने बीवी बच्चों के पास पाकिस्तान नहीं भेजा जाएगा, मैं उनकी देखभाल नहीं कर सकूँगा. जो दूसरे बंदी हैं, उनके लिए कोशिश करते रहना चाहिए. दोनों सरकारों को कैदियों के मामलों को सहानुभूतिपूर्वक देखना चाहिए."

उन्होंने दोनों देशों की सरकारों की शिकायत की और कहा कि उन्हें तो अफ़सरशाही चलाती है बिना ये परवाह किए कि इसमें चाहे जनता का फ़ायदा हो या नुक़सान.

घर लौटना चाहते हैं

डॉ चिश्ती ने अपनी जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि वो अस्सी वर्ष के हो गए हैं और पिछले 20 वर्षों से जेल में हैं इसलिए उन्हें जमानत दे दी जाए.

उन्होंने अदालत से ये कहा था कि उन्हें अपने घर यानी पाकिस्तान के कराची शहर जाने दिया जाए.

अदालत ने कहा कि डॉक्टर चिश्ती पासपोर्ट जमा करवाने के बाद अपने घर जाने के लिए एक नई अर्जी दे सकते हैं

उस अर्जी की सुनवाई तक उन्हें अजमेर ना छोड़ने की हिदायत दी गई है.

पाकिस्तानी नागरिक डॉक्टर ख़लील चिश्ती को अदालत ने 31 जनवरी 2011 को अजमेर में 1992 में हुए एक कत्ल के अभियोग में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई थी.

डॉक्टर चिश्ती का जन्म अजमेर में ही हुआ था, जहां पर उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा भी हासिल की थी.

इससे जुड़ी और सामग्रियाँ

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.