शादी का पंजीकरण अनिवार्य होगा

भारत की शादी
Image caption सभी धर्मों के तहत होने वाली शादियों का पंजीकरण अब अनिवार्य होगा.

भारत में अब सभी धर्मों के तहत होने वाली शादियों का पंजीकरण करना जरूरी होगा. इसके अलावा अब अंतर-धार्मिक शादियाँ करना भी आसान हो जाएगा.

केंद्रीय कैबिनेट ने इससे जुड़े कानून मंत्रालय के प्रस्‍ताव को गुरूवार को मंजूरी दे दी.

केंद्रीय मानव संसाधन और दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरूवार को पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार चालू बजट सत्र में ही इस सबंध में एक बिल संसद में पेश करेगी.

इस कानून के बन जाने के बाद बिना पंजीकरण वाली शादी को गैर कानूनी माना जाएगा और इसके लिए सजा भी हो सकती है.

सिब्बल के अनुसार सभी धर्म के तहत होने वाली शादियों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने के लिए जन्म एंव मृत्यु अधिनियम, 1969 में संशोधन किया जाएगा और संशोधन विधेयक इसी सत्र में पेश किया जाएगा.

सिब्बल के अनुसार कैबिनेट ने सिखों की शादी के पंजीकरण के लिए एक नए कानून बनाने पर भी अपनी मुहर लगा दी है.

सिखों की शादी का पंजीकरण आनंद मैरेज एक्‍ट, 1909 के तहत होगा.

अल्पसंख्यकों को राहत

अब तक सिखों, बौद्धों और जैनों की शादी हिंदू मैरेज एक्‍ट के तहत ही पंजीकृत होती थी जबकि मुस्लिम, पारसी, इसाई और यहूदी धर्म के मानने वालों की शादियों के पंजीकरण के लिए अलग-अलग कानून हैं.

अल्पसंख्यक समुदाय के लोग एक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उनकी शादियों के पंजीकरण के लिए अलग कानून बनाया जाए.

प्रस्तावित विधेयक से उम्मीद है कि शादी और गुजारे भत्ते से जुड़े अदालती मामलों में महिलाओं को कुछ राहत मिलेगी.

भारत की सर्वोच्च अदालत ने फरवरी 2006 में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि भारत के सभी नागरिकों की शादियों के पंजीकरण को अनिवार्य बनाया जाए.

18वी विधि आयोग ने भी अपनी 205वीं रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि सरकार को ऐसा कानून बनाना चाहिए ताकि सभी धर्मों के तहत होने वाली शादियों को एक तय समयसीमा के तहत पंजीकृत किया जा सके.

कपिल सिब्बल ने बताया कि इस बात का पूरा ख्याल रखा गया है कि प्रस्तावित केंद्रीय कानून और पहले से मौजूद राज्यों के कानून के कारण शादियों के पंजीकरण में कोई दिक्कत पेश ना आए.

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