कानूनी दांव पेंच में फंसी विधायक की रिहाई

Image caption हिकाका 24 मार्च को कोरापुट जिले से अगवा कर लिए गए

इतालवी पर्यटक बोसुस्को पाओलो की गुरुवार को रिहाई के बाद आश्वस्त ओडिशा सरकार अब अगवा बीजद विधायक झीना हिकाका की रिहाई को लेकर काफी चिंतित है.

सरकार की चिंता का कारण यह है कि विधायक की रिहाई के बदले जिन 15 चासी मुलिया आदिवासी संघ के सदस्यों को रिहा करने की घोषणा की गई थी, उन्होंने सरकार के सुझाव के अनुसार अदालत में जमानत याचिका दायर करने से साफ इंकार कर दिया है.

माना जाता है कि चासी मुलिया आदिवासी संघ को माओवादियों का समर्थन और शह प्राप्त है.

संघ के सलाहकार और पाओलो की रिहाई के लिए मध्यस्थता करने वाले दंडपानी मोहंती ने बीबीसी से कहा, "संघ के अध्यक्ष नाचिका लिंगा ने मंगलवार को मुझसे संपर्क किया और कहा कि जेल में बंद उनके सहयोगियों की ओर से जमानत क़ी याचिका कतई दायर नहीं की जाएगी. वे चाहते हैं कि सरकार जिन 15 लोगों की रिहाई की घोषणा कर चुकी है, उन पर लगे सारे मामले वापस लिए जाएँ."

मोहंती ने कहा कि कानून सरकार को ऐसा करने की अनुमति देता है.

'वकीलों की लूट'

मोहंती के मुताबिक, "सीआरपीसी की धारा 321 के तहत सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी मामले में अदालत की राय से पहले किसी भी अभियुक्त के खिलाफ मामला वापस ले. इसलिए सरकार को चाहिए कि वह इस धारा के तहत संघ के सभी 15 लोगों के खिलाफ मामले वापस ले."

मोहंती ने कहा कि संघ के सदस्य वकीलों को उन्हें लूटने का मौका नहीं देना चाहते. उनका कहना है, "यह देखा गया है कि आम तौर पर वकील आदिवासियों को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी समझते हैं और बरसों बरस उन्हें लूटते रहते हैं."

मोहंती के इस कड़े रुख के बावजूद राज्य सरकार लक्ष्मीपुर के विधायक झीना हिकाका की रिहाई के लिए उन्हीं पर निर्भर है.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि विधायक को बंदी बनाने वाले सीपीआई (माओवादी) आंध्र ओडिशा बॉर्डर कमिटी ने किसी मध्यस्थ की नियुक्ति से साफ इंकार किया है, इसके बावजूद सरकार मानती है कि मोहंती माओवादियों को उनकी हठ छोड़ने के लिए मना सकते हैं.

अपने आखरी संदेश में आंध्र ओडिशा बॉर्डर कमिटी ने कहा था कि रिहा किया जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सारे मामले वापस लिए जाएँ और उन्हें साथ लेकर विधायक की पत्नी मोहंती और इतालवी पर्यटक मामले में मध्यस्थता करने वाले दूसरे व्यक्ति डॉ. बीडी शर्मा के साथ कोरापुट जिले के बालीपेटा गाँव पहुंचें, तो हिकाका को छोड़ दिया जाएगा.

'और नहीं झुकेगी सरकार'

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Image caption इतालवी पर्यटक बासुस्को की गुरुवार को रिहा कर दिया गया था.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया में सरकार ने कहा था कि यह संभव नहीं है और माओवादियों को सुझाव दिया था कि रिहा किए जाने वाले लोगों के लिए जमानत याचिका दायर की जाए.

लेकिन माओवादियों और चासी मुलिया संघ, दोनों ने जमानत याचिका दायर करने से इंकार कर दिया है जिसके बाद सरकार की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

इस बीच सरकार की और से विधायक क़ी पत्नी को उन्हें वापस लाने के लिए बलिपेता भेजने क़ी संभावना से साफ इंकार किया गया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "जिस तरह की स्थिति बनी हुई है, उसमें विधायक की पत्नी को जंगल के अंदर छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता."

उन्होंने यह भी कहा कि माओवादियों की 'इस हाथ दें उस हाथ लें' मांग को स्वीकार करना भी संभव नहीं है. उनके मुताबिक, "सरकार को जितना झुकना था, वह झुक चुकी है. अब इससे ज्यादा झुकाने की माओवादियों की मंशा कामयाब नहीं होगी."

सूत्रों के अनुसार विधायक की पत्नी समेत उनके परिवार के अन्य सदस्य भी बालीपेटा जाने के लिए तैयार नहीं हैं.

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