सेनाध्यक्ष ने किया नक्सली गढ़ बस्तर का दौरा

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थल सेना के प्रमुख जनरल वी के सिंह के बस्तर दौरे के बाद अब यह साफ़ हो गया है कि सेना छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में अपनी बड़ी पैठ बनाने के लिए कमर कस चुकी है.

हालांकि सेना नें यह पहले ही साफ़ कर दिया है कि बस्तर में उनकी मौजूदगी सिर्फ प्रशिक्षण के लिए है. सेना का यह भी कहना है कि उनका माओवादियों के खिलाफ चल रहे अभियान से कोई लेना देना नहीं है.

मगर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) का कहना है कि सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ बस्तर में सेना को उतार रही है.

शनिवार को थल सेना के प्रमुख जनरल वीके सिंह बस्तर के कोंडागांव के इलाके पहुंचे जहाँ जवानों को छापामार युद्ध का प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

बस्तर में सेना द्वारा आयोजित एक समारोह में सिंह नें सेना के जवानों से कहा कि वह स्थानीय आदिवासियों की भाषा और संस्कृति को समझने और अपनाने की कोशिश करें.

यह पहला मौका है जब थल सेना के किसी भी अध्यक्ष नें देश के सबसे संवेदनशील इलाके का दौरा किया हो. जनरल सिंह के दौरे में उनके साथ सेन्ट्रल कमान के लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चैत, मध्य भारत कमान के लेफ्टिनेंट के जनरल आरएस प्रधान शामिल थे.

बस्तर के दौरे के बाद जनरल वीके सिंह नें छत्तीसगढ़ के राज्यपाल शेखर दत्त और मुख्यमंत्री रमन सिंह से मुलाक़ात की.

कहा जा रहा है कि बातचीत में थल सेना के अध्यक्ष नें छत्तीसगढ़ की सरकार से नारायणपुर, नया रायपुर, सरईपाली और चक्रभाटा में सेना के प्रशिक्षण केन्द्रों की स्थापना के लिए जमीन के आवंटन के संबंध में विचार विमर्श किया.

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