नेताओं को मिलते हैं गहने, स्कॉच, आईपैड...

 सोमवार, 16 अप्रैल, 2012 को 12:56 IST तक के समाचार
स्कॉच

कई अधिकारियों को स्कॉच और वाइन की बोतले तोहफे में मिली

स्कॉच शराब की बोतलों से लेकर सोने चांदी के आभूषणों तक, पेन ड्राइव से लेकर महंगे आईपैड, नोट और मोबाइल फोन तक. भारत के नेता और उच्चाधिकारी जब विदेशों में दौरों पर जाते हैं तो उन्हें 200 रुपए से लेकर 50,000 रुपए तक की कीमत के तोहफे मिलते हैं.

सूचना अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार जनवरी 2011 से लेकर फरवरी 2012 तक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सबसे अधिक तोहफे सरकारी खजाने या तोषाखाने में जमा कराए.

इस दौरान सबसे कीमती तोहफा सोनिया गांधी को एक 'वैनिटी केस' यानी श्रृंगार के सामान की किट और एक लेडीज पर्स के रुप में मिला जिसकी कीमत 50,000 रुपए आंकी गई.

इससे कुछ ही कम कीमत का तोहफा मिला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पत्नी गुरशरन कौर को - 49,250 रुपए की कीमत का पीले रंग का कड़ा.

मनमोहन सिंह को कीमती तोहफे आम मिलते रहते हैं जैसे कि 40,000 रुपए का गुलदान, 20,000 रुपए का चांदी का बाउल, 20,000 हजार रुपए का सोनी कंपनी का हैंडीकैम, 20,000 रुपए की लकड़ी की मूर्ती, 15,000 रुपए की पेंटिंग और 10,000 रुपए का कालीन.

कृष्णा को 'कृष्ण'

लोक सभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज को भी कई तोहफे मिले हैं जिनमें 16,000 रुपए की कीमत का सिक्कों का सेट शामिल है.

एक दौरे पर एसएम कृष्णा को कुछ अन्य तोहफों के अलावा भगवान कृष्ण की तस्वीर दी गई.

कुछ और कीमती तोहफों में 32,000 रुपए का ऐप्पल आईपैड शामिल था जो विदेश सचिव रंजन मथई को मिला और एक 10,000 हजार रुपए का चांदी का बर्तन जो विदेश मंत्रालय के निदेशक संजय सिंह को मिला.

मनमोहन सिंह

प्रधानमंत्री को भी कई कीमती तोहफे मिले हैं

गृह सचिव आरके सिंह को सैमसंग गैलेक्सी नोट मोबाइल फोन मिला जिसकी कीमत नहीं दी गई है.

जिन्हें शराब की बोतलें तोहफे में मिली उनमें शामिल हैं विदेश मंत्रालय के निदेशक दीपक मित्तल (1,000 रुपए की वाइन की बोतल), संजीव सिंगला (1,700 रुपए की जॉनी वॉकर बलैक लेबल और 500 रुपए की वाइन की बोतल), विदेश सचिव के पीएस सुधीर कुमार शर्मा (1,200 रुपए की जॉनी वॉकर रैड लेबल की बोतल और 800 रुपए की वाइन की बोतल) और विदेश सचिव के पीएस बलबीर राज सैनी (800 रुपए की वाइन की बोतल).

वैसे देखने से ऐसा लगता है कि अधिकतर तोहफों की कीमत सरकार ने कम आंकी है.

क्या करते हैं तोहफों का

यह सभी वो तोहफे हैं जो इन अधिकारियों और नेताओं को मिले और उन्होंने सरकारी खजाने में लौटाए जहां से इन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय में या फिर राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए भेजा जाता है.

नियमों के अनुसार ये लोग किसी भी तोहफे को उसकी कीमत में से 5,000 हजार रुपए घटाकर अपने साथ ले जा सकते हैं.

मिसाल के तौर पर केंद्रीय खेल मंत्री अजय माकन को जो 8,000 रुपए का कालीन मिला उसे वे 3,000 रुपए देकर साथ ले गए. ऐसे ही उप-राष्ट्रपति एमएच अनसारी ने 7,000 रुपए के कालीन को अपने पास रखने के लिए 2,000 हजार रुपए दिए.

विदेश मंत्रालय के अधिकारी राजेश कपूर के अनुसार आम लोगों के लिए यह तोहफे खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है.

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